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पाकिस्तान में असीम मुनीर की वजह से संवैधानिक संकट गहराया

सेना प्रमुख ने न्यायपालिका को भंग करने का प्रयास किया

इस्लामाबादः पाकिस्तान में एक बड़ा संवैधानिक और राजनीतिक संकट गहरा गया है, जहाँ सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर पर देश की न्यायपालिका को भंग करने और अपनी शक्ति बढ़ाने का आरोप लगा है। पाकिस्तान की संसद ने हाल ही में 27वाँ संवैधानिक संशोधन पारित किया है, जिसके आलोचकों का कहना है कि यह सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को देश का पहला चीफ डिफेंस फोर्स बनाते हुए उनकी शक्तियों में अभूतपूर्व वृद्धि करेगा। इस संशोधन के माध्यम से, सेना प्रमुख अब राज्य, सेना और धर्म को एक साथ मिलाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे कुछ विश्लेषक अयूब खान और जिया-उल-हक के सैन्य शासनों के मिश्रण के रूप में देख रहे हैं।

यह कदम पाकिस्तान के न्यायिक संस्थानों को कमज़ोर करने और सेना के नियंत्रण को और मजबूत करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है। खबरें बताती हैं कि जनरल मुनीर न्यायपालिका को व्यवस्थित रूप से समाप्त कर रहे हैं, जिससे सत्ता के संतुलन पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। इस दौरान, दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय तनाव भी बढ़ गया है।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हाल ही में चेतावनी दी है कि इस्लामाबाद भारत के साथ पूरी तरह से युद्ध की संभावना को ख़ारिज नहीं कर सकता है, और देश पूर्ण अलर्ट पर है। यह बयान क्षेत्रीय अस्थिरता को दर्शाता है, जो आंतरिक राजनीतिक उथल-पुथल के बीच आया है।

आंतरिक रूप से, पाकिस्तान राजनीतिक रूप से अस्थिर बना हुआ है। इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने दावा किया है कि खान की बहन के साथ अदियाला जेल के बाहर बदसलूकी और हिंसक रूप से हिरासत लिया गया।

यह घटना देश में नागरिक अधिकारों और राजनीतिक असंतोष के प्रति बढ़ती असहिष्णुता को दर्शाती है। इसके अतिरिक्त, एक पाकिस्तानी राजनेता, चौधरी अनवारुल हक (कथित तौर पर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के प्रधानमंत्री), ने दिल्ली के लाल किले के बाहर हुए कार बम विस्फोट में अपने देश की सीधी भूमिका का दावा किया है।

यह बयान भारत-पाकिस्तान संबंधों को और अधिक तनावपूर्ण बना रहा है। कुल मिलाकर, पाकिस्तान में यह घटनाक्रम देश के लोकतांत्रिक और नागरिक संस्थानों के लिए एक गंभीर खतरा है, जहाँ सेना प्रमुख की बढ़ती शक्ति, कमज़ोर होती न्यायपालिका और भारत के साथ बढ़ते तनाव ने वैश्विक चिंताएं बढ़ा दी हैं। यह राजनीतिक संकट दक्षिण एशिया की सुरक्षा और स्थिरता के लिए दूरगामी परिणाम पैदा कर सकता है।