एसआईआर: मुख्य सचिव और मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के घर पहुंची SIR टीम, घर-घर जाकर जुटा रहे वोटरों की जानकारी
रायपुर: मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) अभियान ने छत्तीसगढ़ में रफ्तार पकड़ ली है. रायपुर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक बीएलओ मतदाताओं के घर-घर जाकर गणना प्रपत्र और घोषणा प्रपत्र बांट रहे हैं. केवल पांच दिनों में प्रदेशभर में करीब 30 लाख मतदाताओं तक पहुंचने का रिकॉर्ड बना चुका है.
मुख्य सचिव, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी तक पहुंची बीएलओ टीम: नवा रायपुर स्थित शासकीय आवास पर बीएलओ टीम ने मुख्य सचिव विकास शील से मुलाकात की और उन्हें गणना प्रपत्र (Form-8) एवं घोषणा प्रपत्र (Annexure-4) प्रदान किए. टीम ने मतदाता सूची पुनरीक्षण की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी और आवश्यक दस्तावेज कलेक्ट किए. इसी तरह से रायपुर उत्तर विधानसभा क्षेत्र के देवेंद्र नगर में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी यशवंत कुमार के घर भी बीएलओ पहुंचे और वोटरों से जुड़ी जानकारी जुटाई.
5 दिनों में 30 लाख मतदाताओं तक पहुंची टीम: राज्यभर में 4 से 8 नवंबर के बीच बीएलओ ने 29 लाख 29 हजार 125 मतदाताओं तक पहुंचकर गणना फॉर्म बांटे जो तय टारगेट का लगभग 14 प्रतिशत है. राज्य में पंजीकृत 2 करोड़ 12 लाख 30 हजार 737 मतदाताओं के बीच यह कार्य तेज़ी से जारी है.
डीईओ और ईआरओ कर रहे रेग्युलर मॉनिटरिंग: केंद्रीय निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार प्रत्येक जिले में जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO), निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO) मतदान केंद्र स्तर पर एसआईआर की प्रगति पर सतत निगरानी रख रहे हैं.
नागरिकों से भागीदारी निभाने की अपील: मुख्य सचिव विकास शील ने सभी पात्र नागरिकों से एसआईआर अभियान में सक्रिय सहयोग की अपील की है. मुख्य सचिव विकास शील ने कहा कि मतदाता सूची की सटीकता सुनिश्चित करने में हर मतदाता की भागीदारी महत्वपूर्ण है.
SIR को लेकर विपक्ष का विरोध जारी: स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया शुरू होने से पहले विपक्ष ने इसको लेकर जोरदार विरोध किया. खुद राहुल गांधी इस मुद्दे को लेकर कई बार अपनी पार्टी का विरोध जता चुके हैं. बावजूद इसके चुनाव आयोग का कहना है कि जो तार्किक और सही काम है उसी दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं. बिहार विधानसभा चुनाव से पहले भी इस मुद्दे को इंडिया गठबंधन ने जोर शोर से उठाया लेकिन अब उनका विरोध भी जनता पर असर नहीं दिखा पा रहा है. पश्चिम बंगाल में ममता सरकार का जरुर ये दावा है कि एसआईआर के चलते कई लोग जान देने जैसा घातक कदम भी उठा रहे हैं.