Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Fuel Price Hike: भारत में 11 दिनों में 4 बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम; जानें क्यों दुनिया के मुकाबले... X Monetization Update: कॉपी-पेस्ट करने वाले क्रिएटर्स पर X सख्त; अब ओरिजिनल क्रिएटर को ही मिलेंगे सा... Dandraua Dham Bhind: भिंड में 'डॉक्टर हनुमान' करते हैं गंभीर बीमारियों का इलाज; दर्शन मात्र से दूर ह... World Thyroid Day: क्या थायराइड की दवा जिंदगी भर खानी पड़ती है? जानें इस बीमारी से जुड़े 3 बड़े मिथक... NEET Exam Stress: लातूर में पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के तनाव में NEET छात्रा ने की खुदकुशी Bakrid 2026: बकरीद पर गाय की कुर्बानी न करें मुस्लिम समुदाय; ऑल इंडिया पसमांदा उलेमा बोर्ड की बड़ी अ... J&K NIA Raid: जम्मू-कश्मीर में NIA की बड़ी कार्रवाई; शोपियां और श्रीनगर के कई ठिकानों पर छापेमारी Karnataka River Accident: कर्नाटक के भटकल में बड़ा हादसा; नदी में सीपियां निकालने गए एक ही परिवार के... Muzaffarpur Crime: मुजफ्फरपुर में जिगरी दोस्त की पत्नी को लेकर फरार हुआ युवक; चाकू लेकर घर पर बोला ध... Delhi-Gurugram Traffic: द्वारका एक्सप्रेसवे मायापुरी रिंग रोड तक बढ़ेगा; दिल्ली-गुरुग्राम के बीच 55%...

असहमति को दबाना गंभीर मामला! सोनम वांगचुक की पत्नी की याचिका पर SC ने केंद्र सरकार से मांगा स्पष्टीकरण

लद्दाख के जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को लेकर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. अदालत ने वांगचुक की नजरबंदी के खिलाफ संशोधित अर्जी पर केंद्र व अन्य से 10 दिनों में जवाब मांगा है. ये अर्जी सोनम वांगचुक की पत्नी ने दायर की थी. मामले की अगली सुनवाई 24 नवंबर को होगी.

संशोधित अर्जी में कहा गया है कि यह असहमति को दबाना व राजनीतिक प्रतिशोध का मामला है. अर्जी में सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उनके पति की नज़रबंदी सार्वजनिक व्यवस्था या सुरक्षा की वास्तविक चिंताओं पर आधारित नहीं है. बल्कि असहमति के अपने अधिकार का प्रयोग कर रहे एक सम्मानित नागरिक को चुप कराने की एक सोची-समझी कोशिश है.

याचिका में क्या-क्या कहा गया?

अपनी नज़रबंदी को चुनौती देने के लिए आधार जोड़ने की मांग वाली एक याचिका में अंगमो ने गिरफ्तारी से पहले वांगचुक के खिलाफ की गई कई कार्रवाइयों का हवाला दिया है. जिसमें उनके एनजीओ के लिए विदेशी फंडिंग प्रमाणपत्र रद्द करना भी शामिल है.

वांगचुक को सितंबर में लेह हिंसा के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत हिरासत में लिया गया था. संशोधित याचिका में कहा गया कि यह पूरी तरह से हास्यास्पद है कि लद्दाख और पूरे भारत में जमीनी स्तर पर शिक्षा, नवाचार और पर्यावरण संरक्षण में अपने योगदान के लिए राज्य, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तीन दशकों से भी अधिक समय तक पहचाने जाने के बाद सोनम वांगचुक को अचानक निशाना बनाया गया. चुनावों से मात्र दो महीने पहले और एबीएल, केडीए और गृह मंत्रालय के बीच अंतिम दौर की बातचीत के बाद, उन्हें भूमि पट्टे रद्द करने, एफसीआरए रद्द करने, सीबीआई जांच शुरू करने और आयकर विभाग से समन भेजने के नोटिस दिए गए.

याचिका में आगे कहा गया है कि उनकी हिरासत पांच एफआईआर पर आधारित थी, जिनमें से तीन में उनके खिलाफ किसी भी आरोप का उल्लेख तक नहीं है. चौथी प्राथमिकी वांगचुक के खिलाफ है, लेकिन यह हिंसा से जुड़ी नहीं है. पांचवीं प्राथमिकी 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा से संबंधित है.