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आतंकवाद पर सामूहिक कार्रवाई होः जयशंकर का आह्वान

पूर्वी एशिया शिखऱ सम्मेलन और एशियान में बयान

जकार्ताः पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन और एशियान से संबंधित बैठकों में विदेश मंत्री एस. जयशंकर की सक्रिय भागीदारी भारत की एक्ट ईस्ट नीति और बहुपक्षीय कूटनीति की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। कुआलालंपुर में आयोजित इन शिखर सम्मेलनों में, जयशंकर ने वैश्विक सुरक्षा और स्थिरता पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उनका मुख्य संदेश आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक समुदाय द्वारा सामूहिक कार्रवाई करने की तत्काल आवश्यकता पर केंद्रित था।

विदेश मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि आतंकवाद को किसी भी आधार पर उचित नहीं ठहराया जा सकता है और इसका मुकाबला करने के लिए आत्मरक्षा का अधिकार एक गैर-परक्राम्य सिद्धांत है। उन्होंने सदस्य देशों से आग्रह किया कि वे आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की निंदा करने और उनके वित्तपोषण के स्रोतों को बंद करने के लिए मिलकर काम करें। यह बयान स्पष्ट रूप से सीमा पार आतंकवाद को आश्रय देने वाले देशों के लिए एक संदेश था।

इस शिखर सम्मेलन के दौरान, जयशंकर ने कई द्विपक्षीय बैठकें भी कीं, जिनमें ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्रियों के साथ हुई बैठकें महत्वपूर्ण थीं। इन बैठकों का उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करना था, खासकर सुरक्षा, समुद्री सहयोग, और व्यापार एवं निवेश के क्षेत्रों में।

ऑस्ट्रेलिया के साथ, भारत एक मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत के लिए प्रतिबद्धता को मजबूत कर रहा है, जबकि न्यूजीलैंड के साथ कृषि, शिक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया गया। इन उच्च-स्तरीय मुलाकातों ने क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत की महत्वपूर्ण भूमिका और प्रमुख शक्तियों के साथ तालमेल बनाने की उसकी क्षमता को उजागर किया है। जयशंकर के मुखर रुख ने अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत के बढ़ते कद और वैश्विक मानदंडों को आकार देने की उसकी इच्छा को प्रदर्शित किया है।