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सोनम वांगचुक की पत्नी ने याचिका दायर कर दी

लद्दाख से उपजा विवाद अब शीर्ष अदालत की चौखट पर पहुंचा

  • सरकार ने लगायी गंभीर धाराएं

  • केंद्र पर लगा वादाखिलाफी का आरोप

  • जोधपुर जेल भेजे जाने की सूचना है

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः लद्दाख के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षा सुधारक और नवोन्मेषी सोनम वांगचुक की पत्नी, गीतांजलि अंगमो, ने उनकी नज़रबंदी को चुनौती देते हुए भारत के सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लिए जाने के बाद लद्दाख में राज्य का दर्जा दिए जाने और संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा की मांग को लेकर हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों के बीच तनाव चरम पर है।

गीतांजलि अंगमो द्वारा यह रिट याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत कल दायर की गई थी। इस याचिका में मुख्य रूप से बंदी प्रत्यक्षीकरण की मांग की गई है, जिसके तहत याचिकाकर्ता अपने पति की तत्काल रिहाई की मांग कर रही हैं। सोनम वांगचुक को 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत नज़रबंद किया गया था। कथित तौर पर उन्हें लद्दाख में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसक झड़पों के बाद हिरासत में लिया गया और वर्तमान में वह जोधपुर (राजस्थान) की एक जेल में बंद हैं।

गीतांजलि अंगमो ने अपनी याचिका के माध्यम से तर्क दिया है कि उनके पति की नज़रबंदी अवैध और असंवैधानिक है। उन्होंने यह भी कहा है कि उन्हें वांगचुक के स्वास्थ्य की स्थिति और उन्हें हिरासत में लेने के वास्तविक कारणों के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।

अपनी कानूनी लड़ाई के बारे में बताते हुए, गीतांजलि अंगमो ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, मैंने वांगचुक की नज़रबंदी के खिलाफ बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के ज़रिए भारत के सर्वोच्च न्यायालय से राहत मांगी है। आज एक हफ़्ता हो गया है। अभी भी मुझे सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य, उनकी स्थिति और नज़रबंदी के कारणों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। यह बयान हिरासत में लिए गए व्यक्ति के परिवार की चिंता और अनिश्चितता को दर्शाता है, जिसे कानूनी प्रक्रिया के तहत जानने का अधिकार होता है।

इस याचिका पर तत्काल सुनवाई की उम्मीद है क्योंकि यह एक नागरिक की स्वतंत्रता से जुड़ा मामला है। चूंकि इस समय न्यायालय में दशहरा की छुट्टियां चल रही हैं, इसलिए उम्मीद है कि 6 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के दोबारा खुलने पर इस मामले को शीर्ष प्राथमिकता पर लिया जा सकता है।

रेमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता सोनम वांगचुक, जिन्हें थ्री इडियट्स फिल्म के चरित्र फुंसुक वांगडू के लिए प्रेरणा माना जाता है, लद्दाख में पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों पर एक प्रखर और प्रभावशाली आवाज़ रहे हैं। उन्होंने लंबे समय से लद्दाख के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र और उसकी आदिवासी संस्कृति को बचाने के लिए केंद्र सरकार से इस क्षेत्र को संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है।

उनकी नज़रबंदी लद्दाख में चल रहे आंदोलन को और भी अधिक चर्चा में ले आई है। यह कानूनी लड़ाई अब न केवल सोनम वांगचुक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सवाल है, बल्कि यह लद्दाख के लोगों द्वारा अपने अधिकारों और पहचान की मांग के व्यापक संघर्ष को भी दर्शाती है। सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका पर होने वाली सुनवाई, केंद्र सरकार और नागरिक समाज के बीच के इस संवेदनशील मुद्दे पर दूरगामी प्रभाव डाल सकती है। यह आम धारणा है कि केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध करने की वजह से ही श्री वांगचुक के खिलाफ फर्जी मामले बनाये गये हैं और उनकी राष्ट्रभक्ति के बारे में एक सरकार समर्थक तबका गलत प्रचार में जुटा हुआ है।