पूर्वोत्तर के दौरे पर कई परियोजनाओँ की शुरुआत हुई
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हिंसा के बाद पहला मणिपुर दौरा रहा
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अलग केंद्र शासित प्रदेश का मांग पत्र सौंपा
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भूपेन हजारिका के शताब्दी समारोह में शामिल
भूपेन गोस्वामी
गुवाहाटीः भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में पूर्वोत्तर राज्यों, विशेषकर मिजोरम और मणिपुर का दौरा किया, जो विकास और विरोध दोनों के लिए चर्चा में रहा। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और विकास परियोजनाओं को बढ़ावा देना था, लेकिन उन्हें कुछ समूहों से विरोध का भी सामना करना पड़ा।
प्रधानमंत्री ने मिजोरम की पहली रेल लाइन, 51 किलोमीटर लंबी बैराबी-सायरंग रेलवे लाइन का उद्घाटन किया। इस परियोजना के पूरा होने से मिजोरम की दिल्ली, गुवाहाटी और कोलकाता से सीधी रेल कनेक्टिविटी स्थापित हो गई है। उद्घाटन के दौरान मोदी ने कहा कि यह रेल लाइन सिर्फ एक कनेक्टिविटी नहीं है, बल्कि बदलाव की जीवनरेखा है। प्रधानमंत्री ने उड़ान योजना के तहत हेलीकॉप्टर सेवाओं की शुरुआत की भी घोषणा की, जिससे राज्य के दूरदराज के इलाकों तक पहुंच आसान हो जाएगी।
मिजोरम के बाद, मोदी मणिपुर के लिए रवाना हुए, जहां उन्होंने मई 2023 में भड़की जातीय हिंसा के बाद पहली बार दौरा किया। उनकी यात्रा को क्षेत्र में शांति और विश्वास बहाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया। खराब मौसम और भारी बारिश के कारण उन्हें हवाई यात्रा रद्द करके सड़क मार्ग से इम्फाल से चुराचांदपुर जाना पड़ा। इस यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी थी, खासकर कंगला किले और पीस ग्राउंड के आसपास, जहां उन्होंने सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किए थे।
मणिपुर में, प्रधानमंत्री ने 3600 करोड़ रुपये की मणिपुर अर्बन रोड्स प्रोजेक्ट और 500 करोड़ रुपये की मणिपुर इंफोटेक डेवलपमेंट प्रोजेक्ट सहित कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं इम्फाल में सड़क के बुनियादी ढांचे को मजबूत करेंगी और राज्य के भविष्य को नई ऊर्जा देंगी।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि दिल्ली और कोलकाता में मणिपुर भवन बनाए जाएंगे, जिससे वहां पढ़ने और काम करने वाले छात्रों को किफायती आवास मिलेगा। प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान कुछ समूहों ने विरोध भी किया। असम के अखिल मोरन छात्र संघ (एएमएसयू) ने प्रधानमंत्री के दौरे के विरोध में काला दिवस मनाया।
मणिपुर के 10 विधायकों के एक समूह ने मोदी को एक संयुक्त ज्ञापन सौंपा, जिसमें उन्होंने एक अलग केंद्र शासित प्रदेश के निर्माण की मांग की। इन विधायकों ने आरोप लगाया कि अल्पसंख्यक समुदाय को अभूतपूर्व जातीय उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है और हिंसा में राज्य की मिलीभगत है। इन 10 विधायकों में भाजपा, केपीए और निर्दलीय विधायक शामिल थे, जिन्होंने यह मांग की कि घाटी के इलाकों से बाहर रहने वाले अल्पसंख्यक समुदाय के लिए एक अलग प्रशासनिक इकाई बनाई जाए।
प्रधानमंत्री का असम में भव्य स्वागत किया गया, जहां वह भारत रत्न भूपेन हजारिका के शताब्दी समारोह में शामिल हुए। उन्होंने 18,530 करोड़ रुपये से अधिक की कई बुनियादी ढांचा और औद्योगिक विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया। स्थानीय लोगों ने इन पहलों की सराहना करते हुए कहा कि ये राज्य की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देंगी।
एक स्थानीय निवासी ने कहा कि 18,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं और एक विशेष सिक्के का जारी किया जाना एक बहुत अच्छा कदम है जिससे असम को लाभ होगा और राज्य में प्रगति होगी। प्रधानमंत्री मोदी ने असम के दरांग और गोलाघाट जिलों में भी विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लिया।

यह वीर बलिदानियों की भूमि हैः नरेंद्र मोदी
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शांति और विकास की अपील की लोगों से
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ऑपरेशन सिंदूर में मणिपुर का पराक्रम
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शहीद दीपक चिंगखम को श्रद्धांजलि
उत्तर पूर्व संवाददाता
गुवाहाटीः प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने मणिपुर को भारत के स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रीय सुरक्षा में उसके अतुलनीय योगदान के लिए वीर बलिदानियों की भूमि कहकर उसकी सराहना की है। इंफाल में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, पीएम मोदी ने कहा कि मणिपुर के लोगों ने हमेशा भारत की सुरक्षा में अग्रणी भूमिका निभाई है, चाहे वह आज़ाद हिंद फौज द्वारा तिरंगा फहराने की ऐतिहासिक घटना हो या हाल ही में हुआ ऑपरेशन सिंदूर।
प्रधानमंत्री मोदी ने मणिपुर में हुई हिंसा पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए इसे ‘एक बड़ा अन्याय’ बताया। उन्होंने कहा, मणिपुर में किसी भी तरह की हिंसा दुर्भाग्यपूर्ण है। यह हमारे पूर्वजों और हमारी आने वाली पीढ़ियों के साथ एक बड़ा अन्याय है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि मणिपुर को शांति और विकास की राह पर मिलकर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने राज्य के लोगों से स्वतंत्रता आंदोलन में मणिपुर की गौरवशाली भूमिका से प्रेरणा लेने का आग्रह किया, और याद दिलाया कि कैसे नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने इस राज्य को भारत की स्वतंत्रता का प्रवेश द्वार कहा था।
हाल के सैन्य अभियान, ऑपरेशन सिंदूर का ज़िक्र करते हुए, प्रधानमंत्री ने भारतीय सेना की शक्ति और उसके पराक्रम की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन में भारतीय सैनिकों ने ऐसा साहस दिखाया कि पाकिस्तानी सेना घबरा गई। पीएम मोदी ने इस बात पर विशेष रूप से प्रकाश डाला कि इस सफलता में मणिपुर के कई वीर सपूतों और बेटियों का योगदान शामिल था।
प्रधानमंत्री ने मणिपुर की 7वीं बटालियन के 25 वर्षीय बीएसएफ कांस्टेबल दीपक चिंगखम को विशेष श्रद्धांजलि अर्पित की, जो 10 मई को जम्मू-कश्मीर के आरएस पुरा सेक्टर में पाकिस्तानी सेना की गोलीबारी में शहीद हो गए थे। पीएम मोदी ने उनकी वीरता को सलाम करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनके बलिदान को देश हमेशा याद रखेगा।
दीपक की शहादत के बाद, उनके पिता ने अपने छोटे बेटे, चिंगखम नाओबा सिंह, के लिए राज्य सरकार से नौकरी का अनुरोध किया, ताकि वह परिवार के करीब रह सकें। हालाँकि बीएसएफ ने मणिपुर में ही नौकरी की पेशकश की थी, लेकिन परिवार ने इसे ठुकरा दिया और राज्य सरकार की नौकरी को प्राथमिकता दी। राज्यपाल-परिषद ने परिवार के इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया और इसे राष्ट्रीय सेवा में शहादत से जुड़ा एक असाधारण मामला बताया। परिषद ने कहा कि राष्ट्रीय नायकों के परिवारों का समर्थन करना एक मानवीय कर्तव्य है। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार ने दीपक के परिवार के लिए अनुग्रह राशि को बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दिया।
अपने भाषण के अंत में, प्रधानमंत्री मोदी ने मणिपुर के सांस्कृतिक और खेल योगदान की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा, मणिपुरी संस्कृति के बिना भारतीय संस्कृति अधूरी है। और मणिपुर के खिलाड़ियों के बिना, भारत के खेल भी अधूरे हैं। यह दर्शाता है कि मणिपुर न केवल अपने सैन्य पराक्रम के लिए, बल्कि अपनी समृद्ध संस्कृति और खेल प्रतिभा के लिए भी जाना जाता है।