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अपमान और टैरिफ का नुकसान भूलना आसान नहीः थरूर

ट्रंप के दोस्ती वाले बयान पर कांग्रेस सांसद का सतर्क रुख

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः अमेरिका और भारत के बीच पिछले कुछ समय से व्यापारिक संबंधों में आई कड़वाहट के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान ने एक नई दिशा दी है। चीन यात्रा से लौटने के बाद ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दोस्त और महान नेता बताया, जिससे दोनों देशों के संबंधों में आई खटास को दूर करने की उम्मीद जगी। लेकिन इस सकारात्मक बयान के बावजूद, कांग्रेस नेता शशि थरूर ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। उनका कहना है कि टैरिफ से हुए नुकसान और अपमानजनक बयानों को इतनी जल्दी भूला नहीं जा सकता।

मीडिया से बात करते हुए शशि थरूर ने कहा कि भले ही प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्री ने इस मूलभूत रिश्ते के महत्व पर जोर दिया हो, लेकिन ट्रंप और उनकी टीम की तरफ से आए 50 प्रतिशत टैरिफ और अपमानजनक टिप्पणियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने जोर दिया कि दोनों देशों की सरकारों और राजनयिकों को मिलकर इन मुद्दों को सुलझाने के लिए गंभीर प्रयास करने होंगे।

थरूर ने ट्रंप के उतार-चढ़ाव वाले मिजाज पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि ट्रंप के कई बयानों ने भारत में आहत और नाराजगी का माहौल पैदा किया है और इससे भारतीय आत्मसम्मान को भी ठेस पहुंची है, जिसे भरना जरूरी है। उन्होंने यह भी बताया कि 50 प्रतिशत टैरिफ का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। उदाहरण के लिए, सूरत के हीरा और जवाहरात उद्योग में श्रमिकों की छंटनी शुरू हो चुकी है, तिरुपुर के गारमेंट उद्योग और विशाखापत्तनम के समुद्री उत्पाद (विशेषकर झींगा) निर्यात में भी वास्तविक समस्याएं सामने आई हैं। ये सिर्फ शब्दों की बात नहीं हैं, बल्कि ये ऐसी वास्तविक चुनौतियां हैं जिनसे भारतीय कंपनियां और मजदूर आज जूझ रहे हैं।

थरूर ने कहा कि इन समस्याओं को दूर करने के लिए गंभीर वार्ता और ठोस समाधान की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि भले ही संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात न हो, लेकिन हमारे और अमेरिकी व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के बीच कामकाजी स्तर पर बातचीत होनी चाहिए ताकि कुछ प्रगति हो सके।

अपने बयान के अंत में, शशि थरूर ने ट्रंप के सकारात्मक लहजे का स्वागत किया, लेकिन सतर्कता के साथ। उन्होंने कहा कि इतनी जल्दी सब कुछ भूलना और माफ कर देना संभव नहीं है। भारत को जो वास्तविक समस्याएं झेलनी पड़ रही हैं, उनका समाधान होना ही चाहिए।