अब गरीबों का फायदा तो पहले किसे लाभ था
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने हाल ही में केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार दोनों पर जमकर निशाना साधा है। अपने गृह नगर सैफई में उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए खासकर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के नए स्लैब को लेकर सवाल उठाया।
अखिलेश यादव ने कहा कि जब जीएसटी को पहली बार लागू किया गया था, तो सरकार ने दावा किया था कि यह व्यापार को सरल बनाएगा और व्यापारियों को लाभ पहुंचाएगा। लेकिन अब, जब सरकार गरीबों को राहत देने के नाम पर जीएसटी स्लैब में बदलाव की बात कर रही है, तो यह सवाल उठता है कि अगर अब गरीबों को फायदा होगा, तो अभी तक इसका लाभ किसे मिल रहा था?
अखिलेश यादव ने इस बात पर जोर दिया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में मुनाफाखोरी की आदतें बहुत गहरी हो चुकी हैं। उन्होंने इसका उदाहरण देते हुए कहा कि पारले जी बिस्किट, साबुन के पैकेट, और क्रीम के डिब्बे जैसे उत्पादों का आकार छोटा कर दिया गया था। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या अब ये उत्पाद अपने पुराने, बड़े आकार में वापस आएंगे? उनका कहना था कि मुनाफाखोरी की ये आदतें इतनी जड़ें जमा चुकी हैं कि सिर्फ जीएसटी में संशोधन से इसे रोका नहीं जा सकता।
अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी तगड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज जब आउटसोर्सिंग पर इतना जोर दिया जा रहा है, तो वास्तव में अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को ही आउटसोर्स करने की जरूरत है। यह बयान उन्होंने योगी सरकार की नीतियों और शासन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए दिया। उनका यह बयान मौजूदा सरकार की कार्यप्रणाली पर एक तीखी टिप्पणी थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वे राज्य के शासन से असंतुष्ट हैं।
अखिलेश यादव ने कहा कि अब चुनाव में सिर्फ एक साल का समय बचा है और भाजपा सरकार ने नौ बजट पेश कर दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली की सरकार तीसरी बार सत्ता में है, लेकिन इसके बावजूद देश में हालात खराब होते जा रहे हैं। उनका मानना है कि सरकार द्वारा जीएसटी में लगातार बदलाव की जरूरत यह दर्शाती है कि शुरुआती योजना में ही खामियां थीं।
कुल मिलाकर, अखिलेश यादव ने अपने बयानों से यह संदेश दिया है कि भाजपा सरकार के दावों और हकीकत में बड़ा अंतर है। उन्होंने जीएसटी के जटिल स्वरूप और उसके प्रभावों पर सवाल उठाया, वहीं दूसरी ओर योगी सरकार के कामकाज पर भी अपनी असहमति जाहिर की। उनके ये बयान आने वाले चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल को और भी गरमा सकते हैं।