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यहां पर पुराना गुजरानी फार्मूला नहीं चलेगाः लालू प्रसाद

बिहार के चुनावी गर्मी को राजद प्रमुख के बयान ने हवा दी

राष्ट्रीय खबर

पटनाः लालू यादव का मोदी पर सीधा हमला: “गुजरात को जीत, बिहार को क्या?” बिहार की राजनीति में अपनी बेबाकी और तीखे हमलों के लिए मशहूर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के प्रमुख लालू यादव ने एक बार फिर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोला है।

उन्होंने यह हमला बिहार के विकास और केंद्र की औद्योगिक नीतियों को लेकर किया है। हाल ही में, उन्होंने अपने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक होर्डिंग साझा की, जिसने तुरंत ही राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। इस होर्डिंग के साथ, लालू ने एक बेहद ही प्रभावी और सवालिया नारा लिखा: “ऐ मोदी जी, जीत चाहिए बिहार से और कारखाना दीजिएगा गुजरात में? ये गुजराती फार्मूला बिहार में नहीं चलेगा!”

यह नारा सिर्फ एक साधारण राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि एक गहरी और तीखी टिप्पणी थी जो सीधे-सीधे केंद्र की औद्योगिक नीतियों की दिशा पर सवाल उठाती है। लालू यादव ने इस नारे के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की है कि केंद्र सरकार बिहार जैसे राज्यों को विकास के अवसरों से दूर रख रही है, जबकि अपने गृह राज्य गुजरात को हर क्षेत्र में प्राथमिकता दे रही है। उनकी यह बात बिहार की जनता की उस भावना को छूती है, जहाँ लोग लंबे समय से राज्य में नए उद्योगों की स्थापना और रोज़गार के अवसरों की कमी महसूस कर रहे हैं।

लालू यादव द्वारा साझा की गई इस पोस्ट में एक व्यंग्यात्मक तस्वीर भी शामिल थी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चेहरा एक बड़े चश्मे और सफेद दाढ़ी के साथ दिखाया गया था। यह तस्वीर एक मज़ाकिया लहजे में प्रधानमंत्री की नीतियों पर कटाक्ष करती है। होर्डिंग पर लिखा संदेश स्पष्ट रूप से बिहार के लोगों की भावनाओं को प्रतिबिंबित करता है, जो यह महसूस करते हैं कि उन्हें औद्योगिक विकास से वंचित किया जा रहा है और गुजरात को विकास की दौड़ में आगे रखा जा रहा है।

“गुजराती फार्मूला” शब्द का इस्तेमाल करके, लालू ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिहार की जनता इस तरह की पक्षपातपूर्ण नीतियों को स्वीकार नहीं करेगी। उनका यह बयान बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों के संदर्भ में भी बेहद महत्वपूर्ण है, जहाँ बीजेपी और आरजेडी के बीच खींचतान लगातार बढ़ती जा रही है।

लालू यादव का यह हमला न केवल प्रधानमंत्री की नीतियों पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि बिहार के औद्योगिक भविष्य को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस को भी जन्म देता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और केंद्र सरकार इस तीखे हमले का जवाब कैसे देती है।