बिहार में एक नई राजनीतिक बहस की नींव डाल गये राहुल
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यात्रा का मकसद और हासिल क्या हुआ
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कार्यकर्ताओं में उत्साह और एकता
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सभी घटक दलों में बेहतर तालमेल
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः बिहार में 17 अगस्त को शुरू हुई वोटर अधिकार यात्रा का समापन 25 दिनों बाद सोमवार को पटना में हुआ। इस यात्रा के ज़रिए कांग्रेस और महागठबंधन ने वोटर लिस्ट में हेरफेर के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ बुलंद की। पटना के डाकबंगला चौराहे पर अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बीजेपी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि महादेवपुरा के एटम बम के बाद बिहार में हाइड्रोजन बम आने वाला है, यह बयान इस बात का संकेत है कि महागठबंधन इस मुद्दे पर अपनी लड़ाई जारी रखेगा।
इस यात्रा का मुख्य मकसद था चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण के विरोध में जनता को एकजुट करना। महागठबंधन का मानना है कि इस प्रक्रिया से उनके वोटर्स को वोटर लिस्ट से हटाया जा सकता है, जिससे आगामी चुनावों में उन्हें नुकसान होगा।
राहुल गांधी ने 15 दिनों तक बिहार के 25 ज़िलों में 1300 किलोमीटर की यात्रा की। इस दौरान उनके साथ राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के दीपांकर भट्टाचार्य, और विकासशील इंसान पार्टी के मुकेश सहनी भी शामिल थे। इस यात्रा में सभी दलों के कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में यात्रा के समापन पर भारी भीड़ जमा हुई।
इस यात्रा की सबसे बड़ी सफलता महागठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल थी। राजनीतिक विश्लेषक पुष्पेंद्र कहते हैं, इस यात्रा ने यह साबित कर दिया कि महागठबंधन एकजुट है और तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में कांग्रेस का भी समर्थन है। उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट में बदलाव का सीधा असर महागठबंधन के वोटर्स पर पड़ेगा, इसलिए उनकी एकता महत्वपूर्ण है।
यात्रा के दौरान कांग्रेस, आरजेडी, वीआईपी और वामपंथी दलों के झंडे एक साथ दिखे, जिससे कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा। इस यात्रा ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं में एक नया जोश भर दिया है। सुपौल से आए एक कांग्रेसी कार्यकर्ता ने कहा, इस यात्रा ने यह साबित कर दिया है कि कांग्रेस अपनी ज़मीन वापस पा रही है।
इस यात्रा को लेकर कई तरह के सवाल भी उठ रहे हैं, ख़ासकर चिराग पासवान जैसे नेताओं की तरफ से, जिन्होंने तेजस्वी यादव को ‘कांग्रेस का पिछलग्गू’ कहा है। लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह यात्रा महागठबंधन की आगामी चुनावी रणनीति का एक अहम हिस्सा है, जिसका मकसद न सिर्फ वोटर्स को जागरूक करना है, बल्कि अपनी एकजुटता भी दिखाना है।
इनसे अलग जिस मुद्दे पर मीडिया में बहुत कम चर्चा हुई वह भाकपा माले के कार्यकर्ताओं की मौजूदगी रही। लगभग हर इलाके से गुजरती यात्रा में भाकपा माले का झंडा लिये लोग भी नजर आये। इससे स्पष्ट है कि अपने जनाधार को बढ़ाने में यह वामपंथी संगठन कामयाब हुआ है।