स्थानीय ग्रामीणों ने हाल देखकर समझदारी दिखायी, विभाग को बताया
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लोधकियारी गांव की घटना है यह
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भीड़ देखकर घबड़ा गया था हिरण
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भागने के प्रयास में कुएं में गिरा
कसमार, बोकारो: बोकारो जिले के कसमार प्रखंड के लोधकियारी गांव में सोमवार को एक दुर्लभ और दिल दहला देने वाली घटना ने लोगों को चौंका दिया। सुबह-सुबह जंगल से भटका हुआ एक हिरण आबादी वाले क्षेत्र में आ गया, जिससे गांव में हड़कंप मच गया। शांत और सहमा हुआ हिरण जब ग्रामीणों की नजर में आया, तो लोगों ने उसे कौतूहलवश देखना शुरू किया। हालांकि, इंसानों की भीड़ और शोर से घबराकर हिरण ने भागना शुरू कर दिया। भागने की इसी आपाधापी में वह अपना संतुलन खो बैठा और एक गहरे सूखे कुएं में जा गिरा।
कुएं में हिरण के गिरने की खबर जंगल की आग की तरह पूरे गांव में फैल गई। स्थानीय लोग तुरंत मौके पर पहुंचे। केंद्रीय वन पर्यावरण एवं सुरक्षा समिति के सक्रिय सदस्य, विष्णुचरण महतो, ने बिना देरी किए वन विभाग को इस घटना की सूचना दी। उनकी तत्परता और सूझबूझ ने हिरण की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम, जिसमें प्रभारी वनपाल मो. तोहीद, सुरेश टुडू, देवनाथ महतो और अन्य सदस्य शामिल थे, तत्काल गांव की ओर रवाना हुई।
घटनास्थल पर पहुँचते ही वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों के साथ मिलकर एक संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। कुएं की गहराई और हिरण की घबराहट को देखते हुए यह काम बेहद जोखिम भरा था। ग्रामीणों ने रस्सी और अन्य उपकरणों का इंतजाम किया, जबकि वन विभाग के अधिकारियों ने सावधानीपूर्वक हिरण को बाहर निकालने की योजना बनाई।
घंटों की मशक्कत के बाद, टीम ने आखिरकार हिरण को सुरक्षित रूप से बाहर निकाला। रेस्क्यू के दौरान वहां मौजूद ग्रामीणों में किशुन महतो, परमेश्वर महतो, राजेश महतो, दशरथ महतो, राम महतो, किष्टो महतो, विष्णु चरण महतो, हरिहर महतो, और बंशी महतो सहित कई अन्य लोग शामिल थे। सभी ने मिलकर इस अभियान को सफल बनाया, जो इंसान और वन्यजीव के बीच सौहार्दपूर्ण सह-अस्तित्व का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करता है।
कुएं से निकालने के बाद हिरण को पेटरवार स्थित वन क्षेत्र कार्यालय ले जाया गया। वनपाल मो. तोहीद ने बताया कि हिरण को कोई गंभीर चोट नहीं आई है। वे उसकी पूरी चिकित्सकीय जांच करवाएंगे और सुनिश्चित करेंगे कि वह पूरी तरह से स्वस्थ है। उन्होंने यह भी बताया कि स्वास्थ्य की पुष्टि होने के बाद, हिरण को वापस उसके प्राकृतिक पर्यावास, यानी जंगल में छोड़ दिया जाएगा। यह घटना न केवल वन विभाग की त्वरित कार्रवाई को दर्शाती है, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों की वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और सहृदयता को भी उजागर करती है।