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आधार से मतदाता पंजीकरण नहीं हो सकताः मालवीय

सुप्रीम कोर्ट के आधार संबंधी निर्देश पर भाजपा का बयान

  • यह नागरिकता का प्रमाण नहीं है

  • आधार कानून में भी इसका उल्लेख

  • विपक्ष ने फिर से नया आरोप मढ़ा

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भाजपा ने रविवार को विपक्ष पर दुष्प्रचार करने का आरोप लगाया। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि बिहार में चल रही एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बाहर किए गए मतदाता अन्य दस्तावेज़ों के साथ आधार जमा कर सकते हैं। भाजपा ने ज़ोर देकर कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने यह नहीं कहा कि सिर्फ़ आधार ही मतदान का अधिकार पाने के लिए एक वैध दस्तावेज़ हो सकता है।

भाजपा के आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि आधार केवल पहचान और निवास का प्रमाण है और यह नागरिकता स्थापित नहीं करता। उन्होंने आगे कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फ़ैसले में कहीं भी यह सुझाव नहीं दिया कि इसे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए एक वैध दस्तावेज़ के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

भारत के चुनाव आयोग ने बिहार में मतदाता सूचियों के अपने चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को यह कहते हुए उचित ठहराया है कि यह मतदाता सूची से अयोग्य व्यक्तियों को हटाकर चुनाव की शुद्धता को बढ़ाता है। बिहार से शुरू होकर पूरे भारत में मतदाता सूची की एसआईआर करने के 24 जून के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका में चुनाव आयोग द्वारा दायर हलफनामे में कहा गया है कि कानूनी चिंताओं के बावजूद, आयोग एसआईआर-2025 प्रक्रिया के दौरान पहचान के सीमित उद्देश्य के लिए आधार, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड पर पहले से ही विचार कर रहा है।

श्री मालवीय ने कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं है, किसी सक्षम न्यायालय द्वारा उसे मानसिक रूप से विक्षिप्त घोषित किया गया है या चुनावों में भ्रष्ट आचरण या अपराधों से संबंधित कानून के तहत अयोग्य घोषित किया गया है, तो उसे मतदाता सूची में पंजीकरण से अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा।

उन्होंने आगे कहा कि आधार अधिनियम कहता है कि यह केवल पहचान और निवास का प्रमाण है, और नागरिकता स्थापित नहीं करता है। श्री मालवीय ने कहा, चुनाव आयोग से स्वचालित मतदाता नामांकन के लिए आधार को एक दस्तावेज़ के रूप में शामिल करने का अनुरोध करने से जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 16 और आधार अधिनियम निरर्थक हो जाएँगे। वास्तव में, इसी पीठ ने 12 अगस्त को कहा था कि आधार नागरिकता साबित करने के लिए एक कानूनी दस्तावेज़ नहीं है।

दूसरी तरफ विपक्ष ने फिर यह सवाल उठा दिया कि आखिर हर बार चुनाव आयोग के बचाव में भाजपा ही क्यों आगे आती है। सुप्रीम कोर्ट में आयोग के वकील अपनी दलील भी दे सकते हैं। ऐसे ना कर हर बार आयोग पर लगने वाले आरोपों पर भाजपा की तरफ से ही सफाई पेश की जाती है।