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लंग ऑन ए चिप लोगों को बचायेगा संक्रमण से

वायरसों से लड़ने के लिए नई विधि विकसित की गयी

  • पारंपरिक मॉडलों से बेहतर है यह चिप

  • प्लुरिपोटेंट स्टेम सेल के साथ काम करती

  • दवा परीक्षण और व्यक्तिगत चिकित्सा

राष्ट्रीय खबर

रांचीः कोरोना के बाद, दुनिया को अगली महामारी का डर सता रहा है, और इस चुनौती से निपटने के लिए वैज्ञानिक लगातार प्रयासरत हैं। इसी दिशा में, क्योटो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक अद्भुत और क्रांतिकारी डिवाइस विकसित की है जिसे लंग-ऑन-ए-चिप कहा जाता है। यह सूक्ष्म डिवाइस मानव फेफड़ों के विभिन्न हिस्सों, जैसे कि वायुमार्ग और एल्वेओली को सटीकता से अनुकरण कर सकती है। इस नवाचार का उद्देश्य श्वसन संबंधी संक्रमणों की बेहतर समझ विकसित करना और भविष्य की महामारियों के खिलाफ लड़ाई में एक नया हथियार प्रदान करना है।

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पारंपरिक अनुसंधान मॉडल, जैसे कि जानवरों पर किए गए परीक्षण या सरल इन विट्रो (in vitro) प्रणालियां, अक्सर मानव फेफड़ों की जटिल प्रतिक्रियाओं को सटीक रूप से दोहराने में विफल रहते हैं। फेफड़ों के विभिन्न क्षेत्रों की संक्रमण के प्रति प्रतिक्रियाएं भिन्न होती हैं, और इस भिन्नता को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

क्योटो विश्वविद्यालय की टीम ने इस समस्या का समाधान करने के लिए माइक्रोफिजियोलॉजिकल सिस्टम का उपयोग किया है। यह डिवाइस आइसोजेनिक यानी प्रेरित प्लुरिपोटेंट स्टेम सेल के साथ मिलकर काम करती है, जो इसे और भी प्रभावी बनाती है। आइसोजेनिक iPSC का उपयोग व्यक्तिगत और सटीक उपचारों के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि यह मरीजों के लिए विशिष्ट मॉडल तैयार करने की अनुमति देता है।

इस चिप में दो अलग-अलग खंड हैं, जो फेफड़ों के दो महत्वपूर्ण क्षेत्रों, वायुमार्ग और एल्वेओली, का अनुकरण करते हैं। शोधकर्ताओं ने इन दोनों क्षेत्रों की वायरल संक्रमण के प्रति अलग-अलग प्रतिक्रियाओं का अध्ययन किया है।

यह चिप शोधकर्ताओं को यह समझने में मदद करती है कि कोई विशेष वायरस फेफड़ों के किस हिस्से को कैसे प्रभावित करता है और कौन सी दवा सबसे प्रभावी हो सकती है। टीम के एक सदस्य, डॉ. सचिन यादव बताते हैं कि यह चिप हमें प्रॉक्सिमल (निकटवर्ती) और डिस्टल (दूरस्थ) फेफड़ों के क्षेत्रों की अलग-अलग प्रतिक्रियाओं का मॉडल बनाने में सक्षम बनाती है, और वह भी एक ही आइसोजेनिक स्रोत से।

इस चिप प्रणाली के फायदे सिर्फ वायरल संक्रमणों तक ही सीमित नहीं हैं। यह डिवाइस भविष्य में कई अन्य बीमारियों के अध्ययन और उपचार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। टीम के लीडर डॉ. रयुजी योकोकावा के अनुसार, इस तकनीक का उपयोग अन्य मानव अंगों और बहु-अंग प्रणालियों के मॉडल विकसित करने के लिए भी किया जा सकता है, जिससे अंगों के बीच की जटिल अंतःक्रियाओं का अध्ययन करना संभव हो जाएगा।

यह तकनीक दवा स्क्रीनिंग को भी तेज और अधिक सटीक बना सकती है। वरिष्ठ शोधकर्ता डॉ. ताकेशी नोडा का कहना है कि विभिन्न वायरसों और फेफड़ों के क्षेत्रों के प्रति मेजबान की प्रतिक्रियाओं को सटीकता से दोहराने की क्षमता उभरते वायरसों की हमारी समझ को बढ़ा सकती है और शुरुआती दवा स्क्रीनिंग को आसान बना सकती है।

इसके अलावा, इस डिवाइस का एक बड़ा फायदा व्यक्तिगत चिकित्सा है। वरिष्ठ टीम सदस्य शिंपेई गोटो बताते हैं कि इसका उपयोग करके रोगी-विशिष्ट मॉडल बनाए जा सकते हैं, जिससे प्रत्येक व्यक्ति के लिए सबसे प्रभावी उपचार खोजने में मदद मिलेगी। यह तकनीक भविष्य में चिकित्सा विज्ञान को एक नई दिशा देगी, जहां उपचार को व्यक्तिगत रूप से अनुकूलित किया जा सकेगा। यह छोटा सा लंग-ऑन-ए-चिप डिवाइस न सिर्फ अगली महामारी को समझने और उससे लड़ने में मदद कर सकता है, बल्कि चिकित्सा और दवा विकास के क्षेत्र में एक नई क्रांति ला सकता है।