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भागीरथी नदी मार्ग बदलकर पुराने रास्ते पर लौटी

आक्समिक बाढ़ और बादल फटने से नया ग्लेशियर झील बना

राष्ट्रीय खबर

देहरादूनः अचानक आयी बाढ़ और उसके भूस्खलन ने उत्तरकाशी की हर्षिल घाटी में भागीरथी का मार्ग बदल दिया है। इतना ही नहीं, इस प्राकृतिक आपदा के कारण एक नई विशाल झील का जन्म हुआ है। भूविज्ञानी इस घटना के कारण खतरे की आशंका जता रहे हैं।

ज्ञात हो कि पिछले मंगलवार को हर्षिल घाटी के धराली और हर्षिल गांवों पर आयी आक्समिक बाढ़ अपने साथ लाए बड़े-बड़े पत्थरों और मिट्टी के बहाव के साथ भागीरथी में गिर गया। परिणामस्वरूप, भागीरथी का मार्ग अवरुद्ध हो गया। और इसके कारण एक विशाल झील का जन्म हुआ। भागीरथी का मार्ग भी बदल गया है।

तीन किलोमीटर लंबे इस जल निकाय के आसपास दहशत बढ़ रही है। यह विशाल झील हर्षिल में उस जगह पैदा हुई जहां एक सैन्य शिविर था। हड़प्पा बाण द्वारा लाए गए पत्थरों और मिट्टी के बहाव ने भागीरथी में एक प्राकृतिक बांध बना दिया है।

आशंका है कि खतरा बढ़ रहा है। दरअसल पर्यावरण विशेषज्ञ मानते हैं कि इस भीषण बाढ़ की एक वजह पहाड़ पर किसी ग्लेशियर झील का अचानक फटना भी है। जिसकी वजह से जब बादल फटा तो ढेर सारा पानी अपने साथ करोड़ों टन मलवा लेकर अत्यंत तेज गति से नीचे आया था।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह झील इतनी बड़ी है कि सेना का आधा से ज़्यादा कैंप जलमग्न हो गया है। भूवैज्ञानिकों और स्थानीय लोगों के अनुसार, यह प्राकृतिक बाँध भागीरथी के प्रवाह को बाधित कर रहा है। भागीरथी का मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध नहीं हुआ है, लेकिन अगर प्राकृतिक बाँध के कारण जमा पानी का दबाव बढ़ा, तो बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।

धराली और हर्षिल गाँव पहले से ही भूस्खलन से तबाह हैं। लेकिन स्थानीय लोगों को डर है कि इस नई झील के बनने से इन दोनों गाँवों के लिए खतरा और बढ़ गया है। आपदा के बाद शुक्रवार से अब तक पाँच सौ से ज़्यादा लोगों को बचाया जा चुका है। लापता लोगों की तलाश के लिए अत्याधुनिक उपकरण मँगवाए गए हैं। इस आपदा में अब तक पाँच लोगों की मौत हो चुकी है। 50 से ज़्यादा लोग लापता हैं।