हुजूर आलम, ग्यारह साल आपकी सरकार के हो गये, अब तो पंडित नेहरू का नाम लेना छोड़ दीजिए। प्रियंका गांधी ने सही कहा है कि बार बार इतिहास की चर्चा से वर्तमान की चुनौतियां खत्म नहीं होती। संसद में आपके भाषण में बार बार पंडित नेहरू का जिक्र सुनकर हैरानी होती है कि देश को कौन चला रहा है, नरेंद्र मोदी या पंडित जवाहर लाल नेहरू।
सामान्य शंका रखने वाले मेरे जैसों को छोड़ दीजिए अब तो भक्तों को भी संदेह होने लगा है कि आखिर चल क्या रहा है। अपने ट्रंप साहिब बार बार धमका रहे हैं, अपमानित कर रहे हैं और इधर के छप्पन ईंच का सीना बात को काट भी नहीं रहा है। कहीं अइसा तो नहीं कि अमेरिका में अपने अडाणी जी का जो मामला फंसा है, उसकी वजह से आप चुप्पी साधे बैठे हैं।
गनीमत है कि इस बार संसद का कैमरा सही वक्त पर दूसरी तरफ नहीं चला गया, ट्रंप झूठ बोल रहा है शब्द सुनकर ही आप पानी पीते हुए नजर आ गये। आप तो आप, आपके सहयोगी मोटा भाई भी अब किसी काम के नजर नहीं आते। बातों को गोल मटोल घूमाने से मसला हल नहीं होता और कड़वे सच से आपलोगों को भय लगता है, यह बात भी जाहिर होती चली जा रही है।
कई बार अइसा कंफ्यूजन होता है कि कहीं राहुल गांधी का डोनाल्ड ट्रंप से डाइरेक्ट कनेक्शन तो नहीं है। इधर राहुल गांधी संदेह जाहिर करते हैं और उधर अमेरिका से वैसी ही सूचना आने लगती है। इसके बीच आप बार बार पंडित नेहरू पर जिम्मेदारी डालने की बात करने लगते हैं। इसी बात पर प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर का सुपर हिट गीत याद आने लगा है। इस गीत को संगीत में खुद कैलाश खेर ने ही ढाला था। गीत को बोल कुछ इस तरह हैं।
प्रीत की लत मोहे ऐसी लागी हो गई मैं मतवारी
बल बल जाऊँ अपने पिया को हे मैं जाऊँ वारी वारी
मोहे सुध बुध ना रही तन मन की
ये तो जाने दुनिया सारी
बेबस और लाचार फिरूँ मैं हारी
मैं दिल हारी हारी मैं दिल हारी
तेरे नाम से जी लूँ तेरे नाम से मर जाऊँ
तेरे नाम से जी लूँ तेरे नाम से मर जाऊँ
तेरी जान के सदके में कुछ ऐसा कर जाऊँ
तूने क्या कर डाला मर गयी मैं मिट गयी मैं हो हो
जी हाँ हाँ जी हो गयी मैं तेरी दीवानी दीवानी,
तेरी दीवानी दीवानी
तूने क्या कर डाला मर गयी मैं मिट गयी मैं हो
जी हाँ जी हो गयी मैं तेरी दीवानी दीवानी,
तेरी दीवानी दीवानी इश्क जुनून जब हद से बढ़ जाए
इश्क जुनून जब हद से बढ़ जाए
हँसते हँसते आशिक सूली चढ़ जाए
इश्क का जादू सर चढ़कर बोले
इश्क का जादू सर चढ़कर बोले
खूब लगा लो पेहरे रस्ते रब खोले
यही इश्क दी मर्ज़ी है यही रब दी मर्ज़ी है
यही इश्क दी मर्ज़ी है यही रब दी मर्ज़ी है
तेरे बिन जीना कैसा हाँ खुदगर्ज़ी है
तूने क्या कर डाला मर गयी मैं मिट गयी मैं हो जी
हाँ जी हो गयी मैं तेरी दीवानी दीवानी,
तेरी दीवानी दीवानी तेरी दीवानी दीवानी,
तेरी दीवानी दीवानी
हे मैं रंग रंगीली दीवानी हे मैं रंग रंगीली दीवानी
हे मैं अलबेली मैं मस्तानी गाऊँ बजाऊँ सबको रिझाऊँ
हे मैं दीन धर्म से बेगानी हे मैं दीवानी मैं दीवानी
तेरे नाम से जी लूँ तेरे नाम से मर जाऊँ
तेरे नाम से जी लूँ तेरे नाम से मर जाऊँ
तेरी जान के सदके में कुछ ऐसा कर जाऊँ
तूने क्या कर डाला मर गयी मैं मिट गयी मैं हो जी
हाँ जी हो गयी मैं तेरी दीवानी दीवानी
तेरी दीवानी दीवानी तेरी दीवानी दीवानी
तेरी दीवानी दीवानी तेरी दीवानी
दीवानी तेरी दीवानी दीवानी तेरी दीवानी दीवानी
तो हुजूर आपकी दीवानगी आपको मुबारक, देश को तो सच से अवगत कराइये। बार बार की चक्करघिन्नी का चक्कर भी अब लोगों को पसंद नहीं आ रहा है। दूसरों की छोड़ दीजिए अब तो आपके शरणागत मीडिया वाले, जिन्हें अब गोदी मीडिया कहा जाता है, भी बदले सुर में गीत गाने लगे हैं। आखिर इस ही किस्म का रिकार्ड कितने दिनों तक चलेगा।
जब कहीं दिक्कत हुई तो एक लोकप्रियता का सर्वेक्षण बाहर आ गया कि मोदी जी की श्रेष्ठता कायम है। हुजूर अब आम आदमी को अपने परिवार के दो वक्त की रोटी की चिंता है। पहलगाम में आतंकी हमला और सदन में चर्चा के दौरान ही उन आतंकवादियों के मारे जाने की खबर से जनता की दिमागी भूख शांत नहीं होती। आप कुछ भी कहें पर यह सवाल तो खड़ा ही है कि अगर युद्धविराम दो देशों के बीच हुआ तो सबसे पहले इसकी घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति की तरफ से कैसे की गयी। कहीं नेहरू ने उन्हें बता तो नहीं दिया।