दुनिया भर के नेताओँ की लोकप्रियता पर नया सर्वेक्षण
वाशिंगटनः बातूनी ट्रंप की लोकप्रियता घट रही है, पुतिन-शी टॉप 10 में नहीं! विश्व नेताओं की सूची में मोदी का नंबर क्या है? कभी वह टैरिफ लगाने की धमकी देते हैं। कभी वह पाकिस्तान के पक्ष में भारत विरोधी टिप्पणियां करते हैं। लगभग हर दिन विवादास्पद बयान देने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता घट रही है।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस्लामाबाद के साथ साजिश में शामिल रहे तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन की स्थिति भी काफी अलग है। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना स्थान बरकरार रखा है। लोकप्रियता के मामले में विश्व नेताओं की सूची में चीन के शी जिनपिंग को टॉप 10 में भी जगह नहीं मिली।
इसी साल 25 जुलाई को अमेरिकी बिजनेस इंटेलिजेंस एजेंसी मॉर्निंग कंसल्ट ने डेमोक्रेटिक लीडर अप्रूवल रेटिंग नाम से एक सर्वे रिपोर्ट प्रकाशित की थी। उनके द्वारा तैयार की गई सबसे लोकप्रिय विश्व नेताओं की सूची में प्रधानमंत्री मोदी पहले नंबर पर हैं।
दूसरी ओर, यह स्पष्ट हो गया है कि राष्ट्रपति बनने के महज सात महीनों में ही अमेरिकी जनता के बीच ट्रंप की लोकप्रियता में कितनी गिरावट आई है। अमेरिकी घरेलू राजनीति के संदर्भ में इसे चिंताजनक बताया गया है। मॉर्निंग कंसल्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी अभी भी 75 प्रतिशत भारतीयों के पसंदीदा राजनीतिक नेता हैं।
देश के 18 प्रतिशत निवासी उनके सख्त विरोध में हैं। और केवल सात प्रतिशत भारतीय इस मामले पर कोई राय नहीं देना चाहते थे। ट्रंप को सूची में आठवें स्थान पर रखा गया है। सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया है कि 50 प्रतिशत अमेरिकी अपने राष्ट्रपति से बिल्कुल भी खुश नहीं हैं। ट्रंप पिछले साल नवंबर में हुए चुनावों में राष्ट्रपति चुने गए थे।
उस समय उन्होंने मेक अमेरिका ग्रेट अगेन के नारे के साथ अभियान में तूफान खड़ा कर दिया था। इस दिग्गज रिपब्लिकन नेता ने इस साल जनवरी में दूसरी बार राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी। इस दौरान उनकी लोकप्रियता में उछाल आ रहा था विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप ने अलग-अलग समय पर अलग-अलग बातें कहकर आम अमेरिकी नागरिकों के मन में संदेह पैदा किया है।
दूसरा, उनकी टैरिफ नीति देश के बड़े उद्योगपतियों को नुकसान पहुंचा रही है। इसके अलावा, वहां की आम जनता के बीच भी दिग्गज रिपब्लिकन नेता की विदेश नीति को लेकर सवाल उठे हैं। उनमें से एक वर्ग का दावा है कि ट्रंप दोस्तों से दुश्मनी मोल ले रहे हैं। और महाशक्ति होने के अपने दंभ के कारण अमेरिका धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग पड़ता जा रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद नई टैरिफ नीति की घोषणा की। यह नियम महज चार महीने बाद (यानी 2 अप्रैल) लागू हो गया। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी शेयर बाजार इसलिए धड़ाम हो गया क्योंकि उन्होंने बिना सोचे-समझे वह कदम उठा लिया।