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फिर भी रेत खरीद रहा है सऊदी अरब

पूरे देश में सब तरफ रेगिस्तान ही रेगिस्तान

रियाधः जब हम सऊदी अरब के बारे में सोचते हैं, तो हमारे दिमाग में तुरंत अंतहीन रेगिस्तान की तस्वीर उभर आती है – मीलों तक फैला, तपती धूप में चमकता हुआ। ऐसे में यह जानना वाकई हैरान करने वाला है कि जिस देश के पास अपनी अथाह रेत है, उसे निर्माण कार्यों के लिए दूसरे देशों से अरबों डॉलर की रेत आयात करनी पड़ती है। यह बात पहली बार में एक पहेली जैसी लग सकती है, लेकिन इसके पीछे एक ठोस और तार्किक कारण है।

सऊदी अरब अपनी अर्थव्यवस्था में विविधता लाने और भविष्य के लिए खुद को तैयार करने के लिए एक विशाल बुनियादी ढांचा विकास कार्यक्रम चला रहा है। विजन 2030 के तहत, देश में गगनचुंबी इमारतें, आधुनिक शहर और विशाल परियोजनाएं आकार ले रही हैं। इस महत्वाकांक्षी विकास के लिए बड़ी मात्रा में निर्माण सामग्री की आवश्यकता होती है, और इसमें रेत एक महत्वपूर्ण घटक है। किसी भी मजबूत और टिकाऊ निर्माण के लिए रेत को सीमेंट के साथ मिलाया जाता है, और इस मिश्रण की गुणवत्ता ही इमारत की नींव और मजबूती तय करती है।

यहीं पर सऊदी अरब को चुनौती का सामना करना पड़ता है। हालांकि उसके पास विशाल रेगिस्तान हैं, लेकिन वहां पाई जाने वाली रेत निर्माण कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं है। रेगिस्तान की रेत हवा के लगातार कटाव के कारण अत्यधिक बारीक और गोलाकार होती है। कल्पना कीजिए कि रेत के कण लगातार हवा में उड़ते हुए एक-दूसरे से टकराते हैं; समय के साथ वे घिसकर चिकने और गोल हो जाते हैं। यह रेत भले ही देखने में आकर्षक लगे, लेकिन निर्माण के लिए यह अनुपयोगी है।

निर्माण में उपयोग होने वाली रेत के कणों में खुरदुरापन और नुकीले किनारे होने चाहिए। ये अनियमित आकार के कण सीमेंट के साथ बेहतर तरीके से चिपकते हैं, जिससे एक मजबूत और टिकाऊ मिश्रण बनता है। गोलाकार और चिकनी रेत सीमेंट के साथ ठीक से नहीं मिल पाती है, जिससे निर्माण की पकड़ कमजोर हो जाती है और उसकी मजबूती पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यही कारण है कि रेगिस्तान की रेत का उपयोग कंक्रीट बनाने या इमारतें खड़ी करने में नहीं किया जा सकता।

इसके विपरीत, निर्माण के लिए सबसे उपयुक्त रेत नदियों, झीलों या समुद्र तल से निकाली जाती है। इस प्रकार की रेत के कण बड़े, खुरदुरे और नुकीले होते हैं, जो सीमेंट के साथ एक उत्कृष्ट बंधन बनाते हैं। ये कण आपस में कसकर जुड़ते हैं, जिससे मजबूत और स्थायी संरचनाएं बनती हैं।

चूंकि सऊदी अरब में ऐसी प्राकृतिक जलधाराओं या स्रोतों की कमी है जो इस प्रकार की निर्माण-योग्य रेत प्रदान कर सकें, इसलिए उसके पास इसे विदेशों से आयात करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचता। यही कारण है कि सऊदी अरब को ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों से अरबों की रेत खरीदनी पड़ती है, भले ही उसके अपने देश में रेत का अंतहीन भंडार मौजूद हो। यह दिखाता है कि सिर्फ मात्रा ही मायने नहीं रखती, बल्कि सामग्री की गुणवत्ता और विशिष्टता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।