अपने बच्चों की कस्टडी की मांग कर दी
राष्ट्रीय खबर
बेंगलुरुः कर्नाटक के तटीय शहर गोकर्ण के पास एक सुनसान गुफा में रूसी नागरिक नीना कुटीना और उनकी दो छोटी बेटियों के मिलने के बाद से एक जटिल कानूनी और मानवीय मामला सामने आया है। यह घटनाक्रम बच्चों की कस्टडी को लेकर विवाद का केंद्र बन गया है। इस मामले में एक नया मोड़ तब आया जब इज़राइली नागरिक ड्रोर गोल्डस्टीन, जो खुद को नीना के अलग हुए साथी और बच्चों के पिता बताते हैं, ने अपनी बेटियों प्रेमा (6) और अमा (4) की संयुक्त कस्टडी की मांग की है।
गोल्डस्टीन, जो गोवा और विदेश के बीच अपना समय बिताते हैं, अपनी बेटियों से मिलने के लिए तुमकुरु पहुंचे थे, जहां बच्चे फिलहाल सरकारी हिरासत में हैं। हालांकि, प्रक्रियात्मक बाधाओं के कारण उन्हें विदेशी हिरासत केंद्र में प्रवेश की अनुमति नहीं मिली।
गोल्डस्टीन ने बताया, मैं कार्यालय (विदेशी हिरासत केंद्र) गया और उन्होंने मुझे बताया कि मुझे प्रबंधक के आने तक इंतजार करना होगा। जब वह एक घंटे बाद आईं, तो उन्होंने मुझसे कहा कि मैं अंदर नहीं जा सकता। मुझे एफआरओ (विदेशी पंजीकरण कार्यालय) से एक लिखित कागज़ चाहिए। इसलिए, उन्होंने एफआरओ को फोन किया, और उन्होंने मुझे बताया कि मुझे इस बारे में बात करने के लिए कल सुबह कार्यालय आना होगा। यह घटना बच्चों से मिलने की उनकी तत्काल इच्छा और भारतीय कानूनी प्रक्रियाओं की जटिलता को दर्शाती है।
नीना कुटीना के गुफा में रहने की परिस्थितियों और उनके बच्चों के साथ ऐसी जगह पर क्यों रह रही थीं, यह अभी भी जांच का विषय है। गोल्डस्टीन के दावे कि वह नीना कुटीना को नहीं जानते थे, जबकि उनके बच्चे गुफा में रह रहे थे, इस पूरे मामले में कई सवाल खड़े करते हैं। यह विरोधाभास बच्चों की सुरक्षा और भविष्य के संबंध में चिंताएं बढ़ा रहा है।
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू बच्चों का कल्याण है। प्रेमा और अमा, जो इतनी कम उम्र में ऐसी असामान्य परिस्थितियों में पाई गई हैं, को अब स्थिर और सुरक्षित वातावरण की आवश्यकता है। भारतीय अधिकारियों के लिए यह सुनिश्चित करना एक चुनौती है कि बच्चों को उचित देखभाल और सहायता मिले, जबकि नीना कुटीना और ड्रोर गोल्डस्टीन दोनों के दावों की वैधता की भी जांच की जाए।
बच्चों की कस्टडी का मुद्दा कानूनी दांव-पेंच और भावनात्मक उथल-पुथल से भरा हुआ है, और इसमें दोनों माता-पिता के अधिकारों के साथ-साथ सबसे बढ़कर बच्चों के हित को प्राथमिकता देना होगा। इस मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही और अधिकारियों की जांच ही इस जटिल पहेली को सुलझाने में मदद करेगी।