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माननीय के नाम पर बुढ़मू में बालू का काला खेल !

  • डीएमओ ने बालू लदे दो हाईवा को किया जब्त

  • अवैध बालू के विरुद्ध रांची डीएमओ का अभियान

  • रातु व ठाकुरगांव थाना क्षेत्र से हाईवा को किया है जब्त

रांचीः झारखण्ड में केंद्रीय जांच एजेंसियां ED और NIA अवैध खनन से लेकर टेरर फंडिंग तक कि जांच कर रही है। लेकिन इसके बावजूद बेखौफ माफिया अपने कारनामो को सफेदपोशों की मिलीभगत से अंजाम दे रहे हैं। राजधानी में बालू का काला खेल धड़ल्ले से चल रहा है यह सर्वविदित है लेकिन अब इस खेल में पर्दे के पीछे कुछ माननीय का भी नाम सामने आने लगा है।

बुढ़मू के छापर नदी से हर रात सैकड़ों हाइवा बालू का अवैध खनन हो रहा है। इस मामले में कार्रवाई करते हुए DMO ने बालू लदे  2 हाइवा गाड़ियों को  जप्त किया है। दोनों वाहनों को ठाकुरगांव और रातू क्षेत्र से गिरफ्त में लिया गया। लेकिन जो जानकारियां छनकर सामने आ रही हैं उसके अनुसार 16 मई से 19 मई की रात तक 100 से ज्यादा बालू लदे वाहन खुलेआम निकलते देखे गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक माननीय और उनके करीबी तिवारी जी के नाम पर पूरा धंधा चल रहा है।

छापर नदी से बालू खनन पर दर्ज है पीआईएल

बालू खनन को लेकर हाईकोर्ट में PIL दर्ज है लेकिन चीफ जस्टिस के स्थानांतरण के बाद मामला ठंडा पड़ा हुआ है। इस PIL के जवाब में रांची SSP ने भी एफिडेविट कर बालू खनन और चोरी से सम्बंधित सनहा दर्ज किए जाने की बात मानी थी। लेकिन झारखण्ड की हालत देखिए मामला ठंडे बस्ते में जाते ही एक बार फिर बालू की खुली लूट शुरू हो गयी है।

38 सनहा दबाए बैठी है रांची पुलिस, नहीं दर्ज की प्राथमिकी

झारखण्ड हाईकोर्ट भी रांची पुलिस की कार्यशैली पर हैरान हो गयी है। अवैध खनन (कोयला, बालू) के मामलों को लेकर देश की शीर्ष केंद्रीय एजेंसियां ( ED, NIA) तक जांच कर रही है लेकिन इन तस्करों की सांठगांठ के आगे सारी एजेंसी हलकान हुई पड़ी है। रांची पुलिस ने बालू के अवैध खनन और चोरी के करीब 38 सनहा  बुढ़मू और ठाकुरगांव थाने में है दर्ज किए लेकिन इनमें किसी मे भी रेगुलर केस दर्ज नहीं किया गया। यह जानकारी रांची SSP चंदन सिन्हा के द्वारा हाईकोर्ट में एफिडेविट कर बताई गई है। जिस बालू चोरी को लेकर आए दिन मीडिया में खबरें प्रकाशित हो रही हैं वहीं बुढ़मू थाना क्षेत्र के छापर नदी पर बालू का अवैध खनन रुकने का नाम नहीं ले रहा। नदी का सीना चीर कर बालू चोर लगातार बालू निकाल रहे हैं और सरेआम निर्माण कार्यों में सप्लाई भी कर रहे हैं।।। यही नहीं अवैध बालू का डंप तक बनाकर रखा गया है।

आधा दर्जन स्टॉक लाइसेंस होल्डर और ट्रांसपोर्टर की साजिश

इस पूरे मामले में माननीय और उनके करीबी तिवारी जी के इशारे पर आधा दर्जन से ज्यादा स्टॉक लाइसेंस होल्डर और ट्रांसपोर्टर संलिप्त हैं। लाइसेंस की आड़ में फर्जी चलान काटा जा रहा है जबकि लाइसेंस फार्म में दर्शाए गए स्थान का अगर भौगोलिक सत्यापन किया जाए तो कहीं भी बालू नहीं मिलेगा। बालू सीधे नदी से खनन कर निकाला जा रहा है और गाड़ियों में लोड कर बेचा जा रहा है।

स्थानीय लोगों में दहशत

बालू खनन और चोरी के इस कांड में केवल वह  माननीय और स्थानीय पुलिस ही नहीं बल्कि इलाके के नक्सल और उग्रवादी संगठनों की भी मिलीभगत और अकूत रुपयों का बंदरबांट है। एक तरह से सीधे टेरर फंडिंग को अंजाम दिया जा रहा। इन रुपयों से इलाके के नक्सली उग्रवादी संगठन इलाके में दहशत फैलाकर रखते हैं। स्थानीय लोगों का पुलिस पर से भरोसा उठ गया है और उनका कहना है कि ED या NIA अगर स्टॉक लाइसेंस होल्डर, स्थानीय थानों की पुलिस भर से सख्ती से पूछताछ कर लें तो सारे राज खुल जाएंगे।