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सीसीएल ने जरूरतमंदों के साथ किया बड़ा विश्वासघात

नहीं हो पाया बच्चों का कायाकल्प

  • बड़े बड़े वादे किये गये थे प्रारंभ में

  • निजाम बदला तो बदल गयी चाल भी

  • नुकसान की जिम्मेदारी लेने वाला कौन

मनोज झा

रांची: सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) प्रबंधन ने समाज के जरूरतमंद और वंचित बच्चों के साथ किया विश्वासघात। समाज के वंचित परिवार के बच्चों को बेहतर शिक्षा देने सहित तमाम तरह के वादे और सपना दिखाया था। बच्चे और जरूरतमंद अभिभावकों को लगा शायद अब उनके दिन बहुरेंगे। उनको यह मालूम नहीं था कि कोयला की तरह उनके बच्चों को भविष्य भी काला हो जायेगा।

राजधानी के कांके प्रखंड के बुकरू गांव में सीसीएल ने कायाकल्प योजना के तहत समाज के जरूरतमंद एवं वंचित के बच्चों के लिये समर्पित कायाकल्प पब्लिक स्कूल शुरू किया था। वह महज समाज में कंपनी की छवि को निखरने का प्रयास मात्र था। उद्घाटन के कुछ माह बाद ही स्कूल बंद हो गया। वहां पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य अंधकार में डाल दिया सीसीएल प्रबंधन ने।

कंपनी के सीएसआर मद की राशि से संचालित होने वाले स्कूल और बच्चों के भविष्य की चिंता किसी को नहीं है। ज्ञात हो कि सीसीएल प्रबंधन की ओर से कांके स्थित बुकरू गांव में कायाकल्प पब्लिक स्कूल खोला गया था। इसका बकायदा तात्कालिन मुख्यमंत्री रघुबर दास ने कंपनी के सीएमडी गोपाल सिंह के साथ मिलकर किया था।

श्री गोपाल सिंह ने अपने संबोधन में कहा था कि यहां के बच्चे जब छात्र 9वीं कक्षा में पहुंचेंगे तो उन्हें तकनीकी/कौशल विकास प्रशिक्षण के साथ-साथ मेडिकल, इंजीनियरिंग आदि की कोचिंग दी जाएगी, ताकि छात्र सीबीएसई प्रमाण पत्र के अलावा अतिरिक्त प्रमाण पत्र से लैस हो सकें। इस स्कूल के छात्रों को डिजिटल बोर्ड और वाई-फाई की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

छात्रों को चार जोड़ी स्कूल यूनिफॉर्म दी जाएगी, ताकि माता-पिता को स्कूल यूनिफॉर्म रखने में परेशानी न हो। छात्रों को मुफ्त मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। तमाम तरह के दावे कंपनी की गलत निकली तथा स्कूल में नामांकन करने वाले बच्चों का भविष्य चौपट कर करने में कोई कोर कसर सीसीएल प्रबंधन नहीं छोड़ी है।

कायाकल्प स्कूल के उद्घाटन समारोह में सीसीएल के निदेशक डीके घोष, निदेशक सुबीर चंद्रा, निदेशक आरएस महापात्र, निदेशक एके मिश्रा, मुख्य सतर्कता अधिकारी एके श्रीवास्तव, सीसीएल के सेवानिवृत्त कर्मचारी, प्राचार्य, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता, स्थानीय राजनीतिक नेता और अन्य  उपस्थित थे।

अंदरखाने की खबर है कि ऐसा कड़ा फैसला लेने का प्रबंधन के स्तर पर विचार विमर्श हुआ था। कई लोगों ने यह दलील भी दी थी कि जिन बच्चों को इस स्कूल में लाया गया था, उनका गुणात्मक विकास हो चुका है। कई बच्चे तो अच्छी तरह हिंदी भी बोलने लगे हैं। ऐसे में बीच में स्कूल को बंद करने से इन बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।

इसके अलावा कंपनी द्वारा इस पर खर्च किये गये पैसे की अंतत: बबार्दी हो जाएगी। सूत्र बताते हैं कि वर्तमान प्रबंधन को पूर्व सीएमडी गोपाल सिंह के कार्यकाल में लिये गये फैसलों से कोई सहानुभूति नहीं रही। इसी वजह से शीर्ष प्रबंधन के कड़े फैसले की वजह से इस स्कूल को बंद करने का फैसला लिया गया। वैसे इस फैसले से उत्पन्न होने वाली तमाम परेशानियों की अब तक औपचारिक तौर सीसीएल प्रबंधन ने जिम्मेदारी नहीं ली है।