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ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे.. .. .. .. ..

तुर्किए के राष्ट्रपति तैयबा एर्देगॉन इसी गीत को अचानक गाने लगे हैं। जब वहां भूकंप आया था तो भारतीय राहत दल की तमाम कोशिशों को वह एक पल में भूल गये और पाकिस्तान से अपनी दोस्ती को याद करने लगे। चार दिन के संक्षिप्त युद्ध के बाद उनका भी हाल कुश्ती में पिटे पहलवान जैसी हो गयी है। दरअसल बहुत लंबी लंबी डींग हांककर पाकिस्तान को अपने दुनिया भर में प्रसिद्ध ड्रोन दिये थे।

जब असली परीक्षा की बारी आयी तो यह सब कागज के वैसे हवाई जहाज साबित हुए, जिन्हें हम अपने स्कूल के दिनों में बनाया करते थे। लेकिन भाई लोग भी बहुत शक्की है। अब ड्रोन बनाने वाली कंपनी का गड़ा मुर्दा खोद रहे हैं। कहा जा रहा है कि दरअसल ड्रोन बनाने वाली इस कंपनी में एर्देगॉन के बेटे की भागीदारी है और बिना जांच के ही इसे दुनिया का श्रेष्ठ ड्रोन बताने में खुद तुर्किए के राष्ट्रपति ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। अब भारत और पाकिस्तान की सीमा से मिली रिपोर्ट के बाद ड्रोन बनाने वाली कंपनी के शेयर बीस प्रतिशत नीचे आ गये हैं।

अरे भाई तुम दोस्ती निभा रहे थे तो निभाते रहो। अपुन यानी इंडिया का मैंगो मैन भी अंदर से बहुत जिद्दी होता है। सरकार का कोई फैसला नहीं हुआ पर तुम्हारे बॉयकॉट का मामला तेजी पकड़ गया। एक खोजी अरबपति ने हिसाब लगाकर बता दिया कि तुर्किए और अजरबैजान को भारतीय पर्यटकों से हर साल चार हजार करोड़ का लाभ होता है। प्लेन और होटलों में बुकिंग कैंसिल होने लगी तो लोगों को याद आया कि कुछ ऐसा ही हाल मालद्वीप का भी हुआ था,  जहां के राष्ट्रपति ने बॉयकॉट इंडिया का नारा दिया था। अपने मोदी जी भी बहुत चालाक चीज हैं। कुछ कहा नहीं पर चुपचाप लक्ष्यद्वीप चले गये। तस्वीरों से जनता को जो संदेश मिलना था, वह मिल गया।

अपने अपने शी जिनपिंग को भी याद कर लें। पाकिस्तान को हथियार इसीलिए दिया था ताकि भारत को टेंशन में रखा जा सके। उन्नत विमान, अत्याधुनिक तकनीक और न जाने क्या क्या। अब असली जांच की बारी आयी तो चीनी माल चाइनिज माल ही निकला। चार पल नहीं टिक पाया। अब सोचता हूं कि शायद इसी वजह से लोगों ने चीनी माल को ऐसा मान लिया है।

इसी बात पर सुपरहिट फिल्म शोले का यह गीत याद आ रहा है।इस गीत को लिखा था आनंद बक्षी ने और संगीत में ढाला था राहुल देव वर्मन ने। इसे किशोर कुमार और मन्ना डे ने स्वर प्रदान किया था। फिल्म में इस गीत को अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र पर फिल्माया गया था। गीत के बोल इस तरह हैं।

ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे

तोड़ेंगे दम मगर तेरा साथ ना छोडेंगे

ऐ मेरी जीत तेरी जीत तेरी हार मेरी हार

सुन ऐ मेरे यार

तेरा ग़म मेरा ग़म तेरी जान मेरी जान

ऐसा अपना प्यार

खाना पीना साथ है, मरना जीना साथ है

खाना पीना साथ है, मरना जीना साथ है

सारी ज़िन्दगी

ये दोस्ती …

लोगों को आते हैं दो नज़र हम मगर

ऐसा तो नहीं

हों जुदा या ख़फ़ा ऐ खुदा दे दुआ

ऐसा हो नहीं

ज़ान पर भी खेलेंगे तेरे लिये ले लेंगे

ज़ान पर भी खेलेंगे तेरे लिये ले लेंगे

सबसे दुश्मनी

ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे

तोड़ेंगे दम मगर तेरा साथ ना छोड़ेंगे

दूसरी तरफ देखें तो ट्रंप से अपनी दोस्ती के बाद भी मोदी जी को इस संकट की घड़ी में कोई लाभ नहीं मिल पाया। लाभ यानी राष्ट्रीय हित। दूसरी तरफ सोवियत संघ के युग से जो समर्थन रूस से मिलता रहा था, वह इस बार भी कायम रहा। एक पुरानी कहावत है कि पुराना धान का चावल अधिक पकता है, यह बात फिर से सच साबित हो गयी।

देश के साथ साथ मोदी जी को भी इस भ्रम से बाहर आ जाना चाहिए कि अमेरिका की सोच बदल रही है। अरे भइया वह एक व्यापारी देश है और हमेशा अपने फायदे की बात सोचता है। भारत तरक्की कर जाए, इससे अमेरिका को कोई फायदा नहीं होने वाला। दूसरी तरफ पाकिस्तान अगर इसी हाल में रहा तो इससे अमेरिका को फायदा है। वह चीन और भारत दोनों पर इस देश से नजर रख सकता है। इसलिए अमेरिका की नजर में ओसामा बिन लादेन आतंकवादी था पर हाफिज सईद या मौलाना मसूद अजहर आतंकवादी नहीं हैं।

अंत में मध्यप्रदेश के दो मंत्रियों का भी उल्लेख जरूरी है। एक ने कहा पूरी भारतीय सेना नरेंद्र मोदी के सामने नतमस्तक है। दूसरे ने कहा मोदी जी ने आतंकवादियों का मुकाबला करने उनकी ही बहन को आगे कर दिया। इससे साफ है कि दोनों नेताओं की दिमागी हालत दरअसल क्या है। यह तो इंडियन मैंगो मैन की भलमनसाहत है कि ऐसे लोग भी चुनाव जीत जाते हैं। वरना इनका दिमाग तो वाकई लाजवाब है।