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अचानक के युद्धविराम से हतप्रभ है उग्र समर्थक

ऑपरेशन सिंदूर के चक्कर में भाजपा में कलह का माहौल

  • चौक चौराहों पर भी उठ गये हैं सवाल

  • डोनाल्ड ट्रंप के एलान से और परेशानी

  • मोदी के भाषण से संजीवनी का इंतजार

राष्ट्रीय खबर

रांचीः भाजपा के कट्टर समर्थक भी इनदिनों मोदी से नाराज हैं। दूसरी तरफ मौका देखकर चौका जड़ने वाले भी यह सवाल उछाल रहे हैं कि क्या भाजपा का नेतृत्व अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हाथों चला गया है। जिसमें 56 ईंच के सीना वाले का दावा फुस्स करते हुए वाशिंगटन से ही युद्धविराम का एलान कर दिया है।

दरअसल ऑपरेशन सिंदूर में राष्ट्रीय एकता का जो माहौल बना था,वह अचानक के युद्धविराम से भाजपा के अंदर ही कलह का माहौल बना गया है। पार्टी के बड़े नेता खुलकर इस बारे में बोलने से कतरा रहे हैं। दूसरी तरफ चौक चौराहों पर पार्टी का झंडा ऊंचा रखने वाले अब कुछ कह पाने अथवा सफाई दे पाने की स्थिति में नहीं है।

आम तौर पर रांची के अधिकांश व्यस्त चौक चौराहों पर राजनीतिक दलों के समर्थकों की भीड़ लगती है और चाय की चुस्की के साथ राजनीतिक मुद्दों पर शह एवं मात का खेल निरंतर चलता रहता है। यह पहला अवसर है जब भाजपा समर्थक भी युद्धविराम क्यों हुआ और इससे देश को क्या लाभ हुआ, इस बारे में खुलकर दलील नहीं दे पा रहे है। कुछ लोगों ने तो सार्वजनिक तौर पर इस किस्म के एलान की वजह से अपनी ही पार्टी के फैसले के प्रति नाराजगी भी जाहिर कर दी।

विवाद की स्थिति और बिगड़ने की वजह कांग्रेसियों द्वारा उठाया गया सवाल है। उन्होंने पूछा है कि पूरा मामला ही पहलगाम के आतंकी हमले से जुड़ा हुआ है। इसलिए मोदी सरकार को यह भी बताना चाहिए कि इस हमले में शामिल आतंकवादियों का क्या हुआ। पहले तो उनकी संख्या पांच बतायी गयी थी और यह भी कहा गया था कि उनका पीछा किया जा रहा है।

अचानक से यह काम जनता की आंखों से ओझल होने के बाद सारा ध्यान ऑपरेशन सिंदूर की तरफ चला गया। दूसरी तरफ आम जनता के बीच भी यह सवाल भाजपा समर्थकों को परेशान कर रहा है कि जब पाकिस्तानी सीमा के भीतर घुसकर उसकी सेना को सबक सीखाने का काम भारतीय सेना प्रारंभ कर चुकी थी। फिर अचानक से डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम का एलान कैसे कर दिया।

कुल मिलाकर इस मुद्दे पर भाजपा के अंदर भी एक बड़ा वर्ग पार्टी नेतृत्व द्वारा मामले की लीपापोती वाली दलीलों से खुश नहीं है। इनमें से अधिकांश वैसे मिजाज के लोग हैं जो हमेशा ही युद्ध को एक स्थायी समाधान मानते हैं तथा चार दिन में ही युद्ध रोके जाने के फैसले से खुश नहीं है। जानकार यह मानते हैं कि नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन से जो नये तथ्य मिलेंगे, उसके आधार पर भाजपा के लोग नई दलीलों के साथ जनता को अपने पक्ष में करने के प्रयास में जुट जाएंगे। इस बीच पार्टी के नेताओं ने इस अत्यंत संवेदनशील मुद्दे पर बयान जारी करने से परहेज किया है।