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घटना के दिन दुकान बंद रखने वालों पर भी जांच जारी

पहलगाम आतंकी हमला में एनआईए के जांच की गाड़ी आगे बढ़ रही

  • स्थानीय मददगारों की जांच भी जारी है

  • आस पास मौजूद लोगों से रिकार्ड बनाये गये

  • पाकिस्तानी आतंकवादियों की किसने मदद की

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः पहलगाम आतंकी हमले की जांच कर रही एनआईए टीम हर तथ्य से कड़ी से कड़ी जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही है। यह पता चला है कि एक स्थानीय व्यक्ति, जिसने पर्यटकों पर आतंकी हमले से करीब 15 दिन पहले अपनी दुकान खोली थी और घटना वाले दिन अपनी दुकान नहीं खोली, उससे राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) सहित कई केंद्रीय एजेंसियों के अधिकारी पूछताछ कर रहे हैं।

एनआईए, जो 22 अप्रैल के हमले की जांच कर रही है, जिसमें 26 लोग मारे गए थे, अपनी जांच के तहत पहले ही करीब 100 स्थानीय लोगों से पूछताछ कर चुकी है। पूछताछ के दौरान केंद्रीय एजेंसी को उस व्यक्ति के बारे में पता चला जिसने घटना के दिन अपनी दुकान नहीं खोली थी।

अब केंद्रीय एजेंसियों और एनआईए के अधिकारी उससे पूछताछ कर रहे हैं और कुछ सुराग हासिल करने के लिए उसके इंटरनेट प्रोटोकॉल डिटेल रिकॉर्ड की भी जांच कर रहे हैं। केंद्रीय एजेंसियों के सूत्रों ने कहा कि एनआईए की एक टीम ने उस समय साइट पर मौजूद सभी स्थानीय लोगों की एक सूची तैयार की है और अब उनसे पूछताछ कर रही है।

सूत्र ने कहा, चूंकि मामला एनआईए के पास है, इसलिए हम उन्हें मदद मुहैया करा रहे हैं और सभी स्थानीय लोगों को उनके पास भेज रहे हैं। सूत्र ने कहा, उन्होंने अब तक 100 स्थानीय लोगों से पूछताछ की है, जिनमें टट्टू संचालक, दुकानदार, फोटोग्राफर और साहसिक खेल गतिविधियों में कार्यरत लोग शामिल हैं… उनमें से कुछ ने जांचकर्ताओं को बताया है कि उन्हें उनके उच्चारण के आधार पर या हमलावरों द्वारा उनके धर्म का पता लगाने के बाद बख्शा गया था।

एक अन्य सूत्र ने बताया, पूछताछ के बाद पता चला कि जब वह अल्लाहु अकबर का नारा लगा रहा था तो वह डर गया और तुरंत वहां से चला गया। घर पहुंचने के बाद भी उसने पुलिस समेत किसी को इसकी सूचना नहीं दी। उसने शाम को अपने दोस्त को फोन किया। वैसे जांच के क्रम में ऐसा माना जा रहा है कि पाकिस्तान से आये आतंकवादियों को स्थानीय आतंकवादियों का सहयोग मिला। इसके अलावा भी गुप्त तरीके से अन्य लोगों ने उनकी मदद की। इसी वजह से वे लगातार सुरक्षा एजेंसियों की आंखों से बचते हुए हथियार लेकर वहां पहुंचने में कामयाब रहे, जिसके बाद यह नरसंहार हुआ।