Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
PM Modi Sikkim Visit: सिक्किम के 50 साल पूरे होने पर पीएम मोदी की बड़ी सौगात, ₹4000 करोड़ के प्रोजेक... SCO Meeting 2026: बिश्केक में SCO की बैठक में शामिल होंगे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, क्षेत्रीय सुरक्ष... Firozabad Crime News: फिरोजाबाद में दिनदहाड़े 10 लाख की लूट, तमंचा सटाकर युवक से छीने पैसे, जांच में... Maharashtra MLC Election: शिंदे की शिवसेना में मचा घमासान, नीलम गोरे और बच्चू कडू की उम्मीदवारी पर व... Free Petrol Offer: फ्री पेट्रोल पाने के लिए लगी वाहनों की लंबी लाइन, पंप मालिक के एक फैसले से खिले च... UP Crime Update: हापुड़ में आग का कहर! 70 झुग्गियां और 2 फैक्ट्रियां जलकर स्वाह, मची भारी अफरा-तफरी Positive News: घर आई नन्हीं परी तो पिता ने डॉक्टरों के लिए किया कुछ ऐसा, देखकर पूरा अस्पताल हो गया भ... Dehradun Weather Update: देहरादून में गर्मी ने तोड़ा 17 साल का रिकॉर्ड, रेड अलर्ट जारी; जानें कब मिल... Madhya Pradesh Crime: रीवा में चोरी का अनोखा तरीका, अंडरवियर में छिपाए ब्रांडेड कपड़े, सीसीटीवी में ... Ghazipur News: पीड़ित परिवार से मिलने कल गाजीपुर जाएगा सपा का प्रतिनिधिमंडल, अखिलेश यादव देंगे ₹5 ला...

गिद्धों की आबादी अब लगभग दोगुनी हुई है

वॉयनॉड क्षेत्र से वनजीवन संरक्षण की अच्छी खबर सामने आयी

राष्ट्रीय खबर

तिरुअनंतपुरमः केरल वन विभाग द्वारा गत माह संपन्न हुई तीन दिवसीय समकालिक गिद्ध जनगणना के अनुसार, वॉयनॉड वन क्षेत्र में गिद्धों की संख्या एक साल में दोगुनी से भी अधिक हो गई है, जो 2024 में 53 से बढ़कर 2025 में 113 हो गई है। सर्वेक्षण में 90 सफेद-पूंछ वाले गिद्ध, 17 लाल-सिर वाले गिद्ध और 6 भारतीय गिद्ध दर्ज किए गए।

अधिकारियों ने इस वृद्धि का श्रेय बेहतर आवास स्थितियों और पर्याप्त भोजन की उपलब्धता को दिया है। यह जनगणना 18 शिविरों में की गई थी, जिनमें से प्रत्येक का प्रबंधन चार-सदस्यीय टीम द्वारा किया गया था। इसमें वॉयनॉड वन्यजीव अभयारण्य और दक्षिण और उत्तर वॉयनॉड वन प्रभागों के भीतर के क्षेत्र शामिल थे।

13 शिविरों में गिद्ध देखे गए, जिनमें से 12 इस जंगल की सीमा के भीतर देखे गए। इस सूचना को देश में गिद्धों की विलुप्त के खतरे के बीच बहुत अच्छा संकेत माना गया है। वरना कुछ अरसा पहले पूरे देश में गिद्धों की आबादी विलुप्ति के कगार पर पहुंच गयी थी। इसके लिए प्लास्टिक के अलावा कीटनाशकों अथवा जहर को जिम्मेदार माना गया था। आम तौर पर गिद्ध जंगल या उसके आस पास के इलाके में सफाई कर्मचारी का दर्जा रखते हैं जो लावारिश पशुओं की लाश की सफाई करते हैं। जानवरों के मरने में जहर अथवा कीटनाशक होने की वजह से उन्हें खाकर ऐसे गिद्ध भी तेजी से मरने लगे थे।

सुल्तान बाथरी के सहायक वन्यजीव वार्डन बीआर जयन ने कहा कि संख्या में वृद्धि मुख्य रूप से बेहतर रहने की स्थिति और पर्याप्त भोजन की आपूर्ति के कारण हुई है। सर्वेक्षण दल, जिसमें वन अधिकारी, पक्षी विशेषज्ञ और फोटोग्राफर शामिल थे, ने अलग-अलग स्थानों पर डेरा डाला और दोहराव से बचने के लिए छवियों को कैप्चर और विश्लेषण किया।

सर्वेक्षण में कुल 476 गिद्धों को देखा गया। अंतिम जनसंख्या गणना कर्नाटक और तमिलनाडु में आसन्न वन्यजीव क्षेत्रों के साथ डेटा को क्रॉस-सत्यापित करने के बाद निर्धारित की गई थी, जहां इसी तरह की जनगणना की गई थी। दक्षिण भारत में, गिद्ध केवल पाँच संरक्षित क्षेत्रों में पाए जाते हैं: वॉयनॉड वन्यजीव अभयारण्य (केरल), मुदुमलाई टाइगर रिजर्व और सत्यमंगलम वन्यजीव अभयारण्य (तमिलनाडु), और नागरहोल और बांदीपुर टाइगर रिजर्व (कर्नाटक)। इसके अलावा पश्चिम बंगाल के भी एक केंद्र में गिद्धों के संरक्षण का अभियान चलाया जा रहा है।