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महाशिवरात्रि पर त्रिवेणी में उमड़ा आस्था का महासागर

रात के अंधेरे से ही जुटने लगे थे देश भर के श्रद्धालु

  • एक करोड़ लोगों का आंकड़ा पार हुआ

  • घाटों पर स्नान से पहले सेल्फी की होड़

  • मोदी योगी ने धर्म की रक्षा की बात कही

प्रयागराजः महाशिवरात्रि के महास्रान पर बुधवार को त्रिवेणी संगम में पवित्र स्रान के लिए आस्था का महासागर उमड़ पड़ा। महाकुंभ के अंतिम स्रान पर्व पर करोड़ों श्रद्धालु देर रात से ही पुण्य की कामना के साथ संगम की रेत पर एकत्रित होने लगे। सुबह दस बजे ही 81 लाख से ज्यादा लोगों ने पवित्र स्रान कर लिया।

अंतिम जानकारी मिलने तक स्नान करने वालों का आंकड़ा फिर से एक करोड़ के पार चला गया है। पूर्व परंपरा के मुताबिक महाकुंभ के स्नान का अंतिम दिन महाशिवरात्रि को ही माना गया है। हर-हर गंगे, बम बम भोले और जय श्री राम के गगनभेदी उद्घोष से पूरा मेला क्षेत्र गूंज उठा। इस मौके पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये हैं। डीआईजी वैभव कृष्ण और एसएसपी राजेश द्विवेदी खुद मैदान में उतरकर व्यवस्थाओं की निगरानी करते रहे। श्रद्धालुओं के साथ साधु-संत, महामंडलेश्वर और देश-विदेश से आए भक्त संगम में पवित्र डुबकी लगाते नजर आए।

महाकुंभनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश द्विवेदी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पवित्र स्रान के लिए अद्भुत और दिव्य महाकुंभ की सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गईं। महिला सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित बनाया गया। यातायात पूरी तरह सुचारू रहा और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।

स्रान के बाद श्रद्धालु दान-पुण्य करते दिखे। महाशिवरात्रि पर अंतिम पवित्र स्रान के दौरान इस ऐतिहासिक क्षण को अपने मोबाइल कैमरे में कैद करने के लिए श्रद्धालुओं की उत्सुकता विशेष रही। हर व्यक्ति इस दिव्य अनुभूति को अपने कैमरे में सुरक्षित करने के लिए उत्साहित नजर आया।

लोग स्रान के दौरान और स्रान के बाद सेल्फी से लेकर ग्रुप फोटोज लेते नजर आए। वहीं, तीर्थराज प्रयागराज में इन अद्भुत क्षणों को देश विदेश में बैठे अपने परिजनों को लाइव दिखाने की भी होड़ लगी रही। न ब्राह्मण, न वैश्य, न क्षत्रिय, न शूद्र, सिर्फ सनातन धर्म की शाश्वत सुंदरता और एकता का प्रतीक बनकर संगम तट पर यह पवित्र स्रान संपन्न हुआ।

सुबह के धुंधलके से लेकर दिन चढ़ते तक, गंगा, यमुना और सरस्वती के पवित्र संगम पर श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया। मंत्रोच्चार और भक्ति संगीत के बीच, यह दृश्य सनातन संस्कृति की जीवंतता को दर्शाता रहा। प्रशासन द्वारा सुरक्षा और व्यवस्था के लिए किए गए कड़े इंतजामों के बीच यह महाकुंभ महज धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन समाज की एकजुटता और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक बन गया। महाशिवरात्रि का यह स्रान कुम्भ के समापन का एक ऐतिहासिक क्षण रहा। महाकुंभ 2025 न केवल एक धार्मिक आयोजन बन गया, बल्कि यह राष्ट्रीय एकता और सनातन संस्कृति के संकल्प का प्रतीक भी बन गया है।

पीएम मोदी और सीएम योगी ने इसे एकता का महाकुंभ करार देते हुए देशवासियों को एक सूत्र में बांधने का संदेश दिया था। संगम तट पर लाखों श्रद्धालुओं का समागम इस संकल्प की जीवंत तस्वीर पेश कर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जहां इस महाकुंभ को भव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए दिन-रात प्रयास किए, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मार्गदर्शन से इसे वैश्विक पटल पर पहचान दिलाई।

सीएम योगी ने महाकुंभ को लेकर कहा था कि यह आयोजन जाति, पंथ और वर्ग के भेदभाव को मिटाकर एक भारत-श्रेष्ठ भारत की भावना को मजबूत करता है। लाखों श्रद्धालुओं ने एकजुट होकर यह सिद्ध कर दिखाया कि एकता ही हमारी असली पहचान है। महाशिवरात्रि के पवित्र अवसर पर अंतिम स्रान के साथ महाकुंभ का समापन हुआ, लेकिन इसका संदेश विश्व भर में गूंज रहा है। योगी और मोदी के संकल्प से प्रेरित यह महाकुंभ न सिर्फ आध्यात्मिक शक्ति का प्रदर्शन है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और आर्थिक ताकत को भी रेखांकित कर रहा है।