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सीतारमण ने असली मुद्दों से ध्यान भटकाया: राघव

आम आदमी पार्टी के सांसद ने बजट पर अपनी बात रखी

  • आयकर में छूट का उल्लेख किया

  • मध्यम वर्ग को गुमराह किया गया

  • राज्यसभा में बोलने नहीं दिया गया

नईदिल्लीः आम आदमी पार्टी(आप) के राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तकनीकी शब्दों का इस्तेमाल करके मध्यम वर्ग को गुमराह करने और असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश की है।  श्री चड्ढा ने एक्स पर आज वीडियो जारी करके बताया कि कैसे वित्त मंत्री ने तकनीकी शब्दों का इस्तेमाल करके मध्यम वर्ग को गुमराह करने और असली टैक्स मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश की है।

वित्त मंत्री ने उनकी बातों का मजाक उड़ाया और उन पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया, जबकि उन्हें राज्यसभा में अपनी स्थिति स्पष्ट करने का मौका नहीं दिया गया इसलिए उन्होंने सीधे वीडियो के जरिए इस मुद्दे पर अपनी बात कही है। उन्होंने  स्पष्ट किया कि उनके बजट भाषण में कई महत्वपूर्ण विषय शामिल थे।

उन्होंने रेल यात्रियों की समस्याएं, मिडिल क्लास की खस्ता माली हालत, अमेरिकी प्रशासन द्वारा लगाए गए टैरिफ और गिरते भारतीय रुपये पर अपनी बात संसद में रखी थी लेकिन वित्त मंत्री ने इन गंभीर मुद्दों को नजरअंदाज कर दिया और केवल उनके द्वारा टैक्स छूट को लेकर दिए गए एक उदाहरण पर ध्यान केंद्रित किया, जिसमें उन्होंने आयकर छूट के गणित को समझाने की कोशिश की थी।

आप नेता ने कहा, ह्लमैं अपनी बात पर पूरी तरह से कायम हूं। बारह लाख रुपये की छूट कोई कर छूट या कटौती नहीं है, बल्कि यह एक टैक्स रिबेट है। इसका मतलब यह है कि यदि कोई व्यक्ति वित्तीय वर्ष में 12 लाख से एक रुपया भी अधिक कमाता है, तो उसे पूरी आमदनी पर टैक्स देना होगा।

वित्त मंत्री ने इस उदाहरण को तकनीकी रूप से मुश्किल बनाने की कोशिश की और यह दिखाने की कोशिश की, अगर कोई व्यक्ति 12 लाख से अधिक कमाता है, तो उसे पूरी आय पर कर देना होगा।ह्व श्री चड्ढा ने वित्त मंत्री द्वारा की गई व्यक्तिगत टिप्पणियों पर भी निराशा जताई। उन्होंने कहा, उन्होंने मेरे बयान पर व्यक्तिगत टिप्पणी की।

मैं बस यही कहना चाहता हूं कि मैं वित्त मंत्री का पूरा सम्मान करता हूं। वे मुझसे अधिक अनुभवी हैं, वरिष्ठ पद पर हैं और उम्र में भी मुझसे बड़ी हैं। मेरी बस यही अपील है कि भविष्य में वे इस तरह की व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचें और सिंपल टैक्स कॉन्सेप्ट्स को तकनीकी रूप से मुश्किल न बना कर आसान भाषा में जनता के सामने पेश करें।