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श्रीराम का नारा वाले जयराम को नहीं पहचान पाये

चैनल पर भरोसा ने पूरी तरह लुटिया डूबो दी

  • जिला स्तर तक इसकी खबर आ रही थी

  • एक चैनल ने हेमंत से दुश्मनी निकाली

  • चैनल पर भरोसा कर गच्चा खा गये हिमंता

राष्ट्रीय खबर

 

रांचीः झारखंड विधानसभा का चुनाव परिणाम आ चुका है। इसमें भाजपा की बुरी गत हुई है। अब इसके एक कारण के तौर पर खुद भाजपा वाले भी स्वीकार कर रहे हैं कि चौबीस सीटों पर जयराम महतो के प्रत्याशियों की वजह से उसकी हार हुई है।

इसी वजह से यह सवाल खड़ा हो गया है कि पन्ना प्रमुख तक के संगठन के लोग इस असर को पहले क्यों नहीं भांप पाये और क्या इस बारे में ग्रामीण इलाकों से आ रही सूचनाओं को जिला स्तर पर ही दबा दिया गया।

प्रदेश स्तर के भाजपा नेताओं में से कई ने दबी जुबान से स्वीकार किया कि दरअसल यह चुनाव ही प्रदेश के हाथों से पूरी तरह निकल गया था। शिवराज सिंह चौहान के  बाद खास तौर पर हिमंता बिस्वा सरमा ने इसे पूरी तरह हाईजैक ही कर लिया था।

जिसका नतीजा था कि चुनाव प्रचार के दौरान विभिन्न इलाकों से आ रही सूचनाओं के मुताबिक रणनीति को बदलने का काम नहीं किया गया। खास तौर पर संथालपरगना में बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा पूरी तरह धोबिया पाट खा गया।

वैसे संघ से जुड़े लोग मानते हैं कि बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा असम में गंभीर मसला है। दूसरी तरफ असम के जानकार बताते हैं कि सुबह होने से पहले विभिन्न रास्तों से बांग्लादेश से असम आने वाले लोग दिन भर असम में रिक्शा चालक का काम करते हैं।

वे अंधेरा होने के बाद फिर चुपचाप बांग्लादेश लौट जाते हैं। ऐसे अनेक लोग बांग्लादेश के अपने अपने गांवों में संपन्न लोगों की श्रेणी में आ गये हैं। लिहाजा इस आर्थिक विषमता, प्राकृतिक चुनौती और रोजगार के अवसरों की कमी से यह समस्या बढ़ती जा रही है।

फिर भी झारखंड मे यह मुद्दा बुरी तरह विफल हुआ है। अब दूसरे मुद्दे की बात करें तो हिमंता बिस्वा सरमा के भी भ्रमित होने के पीछे एक चैनल की भूमिका रही।

इस चैनल ने अपने कारणों से हेमंत सोरेन विरोधी मोर्चा को हवा दी और हिमंता बिस्वा सरमा को यह भरोसा दिलाता रहा कि उनका मुद्दा पूरा राज्य में जबर्दस्त तरीके से काम कर रहा है। पिछले दिनों भाजपा की जीत सुनिश्चित बताने के तमाम वीडियो का प्रसारण हुआ।

जमीनी हकीकत से जुड़े लोगों ने ऐसे वीडियो को न सिर्फ सोशल मीडिया में लगातार शेयर किया बल्कि अपने ऊपर के नेताओं को भी वीडियो भेजकर भ्रमित कर दिया।

परिणामों से स्पष्ट कर दिया है कि मईया योजना का प्रभाव रखा है और बड़ी बात यह है कि झारखंड के आदिवासियों की भाजपा के प्रति नाराजगी अब तक कम नहीं हुई है। भाजपा के तमाम नेताओं को पता है कि उस नाराजगी की वजह कौन भाजपा नेता था। फिर भी यह ऊपर के अनुशासन की मजबूरी है कि लोग इस सच्चाई को भी कहने से डर रहे हैं।