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इस बार कृषि कानूनों पर कंगना रनौत का बयान

बड़बोलेपन ने भाजपा की परेशानी बढ़ायी, पार्टी का खंडन आया

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः हरियाणा में जारी विधानसभा चुनाव के बीच ही भाजपा ने निरस्त कृषि कानूनों पर कंगना रनौत की टिप्पणी से खुद को अलग कर लिया। अभिनेत्री से नेता बनीं कंगना रनौत एक बार फिर विवादों में घिर गईं, जब भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व में निरस्त किए गए कृषि कानूनों पर सांसद द्वारा दिए गए बयान से खुद को अलग कर लिया, जिसके बाद बुधवार को उन्हें अपनी टिप्पणी वापस लेनी पड़ी।

सुश्री रनौत ने मीडिया से कहा, मुझे पता है कि यह बयान विवादास्पद हो सकता है, लेकिन तीनों कृषि कानूनों को वापस लाया जाना चाहिए। किसानों को खुद इसकी मांग करनी चाहिए। उनके इस बयान पर विपक्ष की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आईं। मंगलवार की देर रात भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने स्पष्ट किया कि सुश्री रनौत की टिप्पणी उनके निजी विचार थे और वे इस मुद्दे पर पार्टी की स्थिति को नहीं दर्शाते।

उन्होंने कहा, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भाजपा सांसद कंगना रनौत का केंद्र सरकार द्वारा वापस लिए गए कृषि विधेयकों पर बयान वायरल हो रहा है। मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि यह बयान उनका निजी बयान है। इसलिए हम इस बयान को अस्वीकार करते हैं।

सुश्री रनौत ने बाद में एक बयान जारी किया। उन्होंने कहा, पिछले कुछ दिनों में मीडिया ने मुझसे किसान कानून पर कुछ सवाल पूछे और मैंने सुझाव दिया कि किसानों को पीएम मोदी से किसान कानून वापस लाने का अनुरोध करना चाहिए। मेरे बयान से कई लोग निराश और हताश हैं।

जब किसान कानून प्रस्तावित किया गया था, तो हममें से कई लोगों ने इसका समर्थन किया था लेकिन हमारे प्रधानमंत्री ने बड़ी संवेदनशीलता और सहानुभूति के साथ इसे वापस ले लिया। और हम सभी कार्यकर्ताओं का यह कर्तव्य है कि हम उनके शब्दों की गरिमा का सम्मान करें। रनौत ने कहा, मुझे यह भी ध्यान में रखना होगा। मैं कोई कलाकार नहीं हूं। मैं भारतीय जनता पार्टी की कार्यकर्ता हूं और मेरी राय मेरी अपनी नहीं बल्कि पार्टी का रुख होनी चाहिए। इसलिए, अगर मैं अपने शब्दों और अपनी सोच से किसी को निराश करती हूं, तो मुझे खेद होगा और मैं अपने शब्द वापस लेती हूं।