Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
South Star Rumoured Breakup: डेटिंग की खबरों के बीच धनुष और मृणाल ठाकुर के अलग होने की चर्चा; जानिए ... US-Iran Peace Talks: स्विट्जरलैंड में अमेरिका-ईरान की बड़ी बैठक; 60 दिनों में स्थायी शांति समझौते की ... NEET Re-Exam 2026: NTA की बड़ी तकनीकी चूक; नागपुर के छात्र को आवंटित कर दिया अबू धाबी का परीक्षा केंद... प्लाज्मा तकनीक से भविष्य के कंप्यूटर और तेज चलेंगे मणिपुर के चुराचांदपुर अस्पताल में बवाल आग लगाने की कोशिश केवल दाऊद इब्राहिम का शामिल होना बाकी है: संजय सिंह आज नेता प्रतिपक्ष को जन्मदिन की बधाई दी दिपके ने मोदी से छात्रों की आत्महत्या पर मुआवजा मांगा नासिक में विधान परिषद के चुनाव में नया राष्ट्रीय रिकार्ड लेबनान पर इजरायली हमले में 18 लोगों की मौत

झारखंड सरकार के गले में हड्डी बन जाएगा डीजीपी बदलने का फैसला

अब विधायक सरयू राय ने भी याचिका दायर की

  • चंद्रचूड़ का पूर्व फैसला सभी की जानकारी में

  • अनुराग गुप्ता पहले रघुवर दास के करीबी थे

  • नया पैनल भी शायद नामंजूर हो सकता है

रजत कुमार गुप्ता

रांचीः झारखंड में डीजीपी को अचानक बदल देने के हेमंत सरकार का फैसला फंस सकता है। इस मामले में पहले ही एक याचिका दायर की गयी थी। अब जानकारी मिली है कि जमशेदपुर के विधायक सरयू राय ने भी इसी मामले में अलग से याचिका दायर की है। सरयू राय की याचिका का राजनीतिक निहितार्थ गंभीर है क्योंकि पहले भी रघुवर दास के शासन काल में उनके खिलाफ मामला दर्ज करने वाले अनुराग गुप्ता ही अभी राज्य के प्रभारी डीजीपी है।

पूर्व में दाखिल याचिका पर आज ही सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने वाली थी, जो किसी वजह से नहीं हो पायी। इस बीच खबर यह है कि सात अन्य राज्यों में भी डीजीपी बदलने का राज्य सरकारों का फैसला याचिका के विचारणीय विषय में शामिल हो गया है।

याद दिला दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इस किस्म के मामले में पहले कई फैसले सुनाये हैं। झारखंड के डीजीपी के मामले में यह फैसला खुद वाई वी चंद्रचूड़ ने सुनाया था, जो अभी सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश हैं। उस पुराने आदेश में यह साफ कर दिया गया था कि बिना किसी आरोप के किसी भी डीजीपी को उनका कार्यकाल पूरा होने तक नहीं हटाया जाएगा।

अदालती फैसले में यह साफ साफ लिखा था कि अगर इस अदालती आदेश का उल्लंघन किया जाता है तो उसे अदालत की अवमानना माना जाएगा। झारखंड में अजय कुमार सिंह को भी बिना किसी गंभीर आरोप के अचानक हटा दिया गया है। सूत्रों की माने तो उस अफसर से किसी मुद्दों पर कोई स्पष्टीकरण तक नहीं मांगा गया था। लिहाजा पहले से ही यह अंदेशा है कि राज्य सरकार का यह फैसला शीर्ष अदालत में नकारा जा सकता है।

अब सरयू राय के भी मैदान में आने की वजह से यह लड़ाई रोचक स्थिति में पहूंच गया है। मजेदार स्थिति यह है कि जब सरयू राय के खिलाफ मामला किया गया था तो अनुराग गुप्ता तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास के बहुत करीबी थे। अब बदले हालात में वह हेमंत सोरेन के करीबी हो गये हैं।

जिसकी वजह से परंपरा से हटते हुए राज्य पुलिस के तीन महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी उनके पास छोड़ी गयी है। सरयू राय के मैदान में होने की वजह से चुनाव संचालन में अनुराग गुप्ता का रह पाना भी असंभव सा माना जा रहा है क्योंकि चुनाव आयोग पूर्व में भी उनके खिलाफ निर्देश जारी कर चुकी थी। जिसकी वजह से उन्हें रांची से हटाकर अस्थायी तौर पर नईदिल्ली में पदस्थापित किया गया था।

अदालत में याचिका दायर होने के बाद राज्य सरकार ने एक वरीयताक्रम का पैनल बनाकर यूपीएससी को भेजा है। चर्चा है कि इस पैनल में भी अजय कुमार सिंह का नाम शामिल नहीं होने की वजह से यह पैनल भी शीर्ष अदालत द्वारा अस्वीकृत किया जा सकता है। कुल मिलाकर विधानसभा चुनाव के ठीक पहले यह सारी परिस्थितियां हेमंत सरकार के लिए परेशानियां खड़ी कर सकती है।