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सरकारी पत्र का इंतजार कर रहे हैं आंदोलनकारी

कोलकाता में जूनियर डाक्टरों के धरनास्थल से तंबू, कनात हटा

  • रात से ही सामान हटाने का काम प्रारंभ

  • सुबह भी तंबू के साथ पंखे भी हटाये गये

  • अस्थायी बिस्तरों को अभी नहीं हटाया गया

राष्ट्रीय खबर

 

कोलकाताः मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ तीसरी बार की वार्ता के बाद अब जूनियर डाक्टर धरनास्थल से हटने की तैयारियों में जुटे हैं। वैसे आंदोलनकारियों को अब सिर्फ सरकारी पत्र का इंतजार है, जो अब तक नहीं पहुंचा है। इस बीच वहां से तंबू और अन्य सामान हटाने का काम प्रारंभ हो गया है।

इस बारे में जूनियर डॉक्टर का कहना है कि पुलिस ने धरना प्रदर्शन पर कोई दबाव नहीं डाला।बुधवार की रात से ही स्वास्थ्य भवन के सामने जूनियर डॉक्टरों के धरना मंच से डेकोरेटर के लोग पंडाल के बांस और पेडस्टल फैन हटाते दिखे। क्या किसी पर पद छोड़ने का दबाव है?

इस बारे में जब आंदोलन के एक जूनियर डॉक्टर से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, बुधवार रात से हम बांस, त्रिपाल आदि ले जाते हुए देख रहे हैं। इसको लेकर काफी चर्चा हो रही है। ये सब जनता का दिया हुआ है।

अब अगर किसी को लगता है कि वह इसके लिए पैसे नहीं देगा तो धरना स्थल से पंखे, ट्रिपल उठा लिए जाएंगे। हमें इस बारे में कुछ नहीं कहना है। लेकिन पुलिस अभी भी हमारा पूरा सहयोग कर रही है। उन पर कोई दबाव नहीं था। हमारा आंदोलन जारी है।

जूनियर डॉक्टर्स फोरम ने गुरुवार को कहा, बुधवार रात से ही असमंजस की स्थिति है, डेकोरेटर्स पर पुलिस के दबाव की भी खबरें आ रही हैं। इन समस्याओं को बातचीत से सुलझा लिया गया है। पुलिस ने यह भी बताया कि यह अफवाह पूरी तरह से झूठी है।

पुलिस की ओर से बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट के डीसी अनीश सरकार ने कहा, सोशल मीडिया पर ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं। लेकिन पुलिस की ओर से ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया गया।

हमने डॉक्टरों से कहा है कि अगर कोई शिकायत हो तो हमें बताएं। हम उचित कार्रवाई करेंगे। इस बीच सवाल फिर उठता है कि आखिर जूनियर डॉक्टर दोबारा अपनी मांगें ड्राफ्ट के रूप में मुख्य सचिव को ईमेल से कब भेजेंगे? ईमेल में क्या होगा?

अब पूरे प्रदेश को उस दिशा का इंतजार है। बुधवार रात करीब पांच घंटे बाद नवान्न से निकलने के बाद डॉक्टरों ने कहा कि बुधवार की चर्चा काफी निराशाजनक रही। हर तरह से सिर्फ मौखिक आश्वासन ही मिला है। मौखिक रूप से कहने के बावजूद लिखित आश्वासन नहीं दिया गया। इसके बजाय, मुख्य सचिव ने डॉक्टरों से अपनी मांगों को लिखित रूप में मेल करने को कहा। डॉक्टर गुरुवार को ही ईमेल भेज देंगे। वे प्रशासन के अगले निर्देश तक इंतजार करेंगे।