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मेरा दिल भी कितना पागल .. .. .. ..

किसी का जादू सर चढ़कर बोले तभी तो ऐसी हालत हो जाती है। अचानक से लोगों की अंतरात्मा जाग रही है और वे खेमा बदल रहे हैं। दरअसल मैंगो मैन के लिए चिंता का विषय हो अथवा ना हो लेकिन चुनाव करीब आने से राजनीतिक दलों के नेताओं की धुकधुकी बढ़ जाती है। लिहाजा प्यार जगा रहे हैं।

कर्नाटक में एक की अंतरात्मा जागी तो भाजपा को परेशानी हो गयी और उधर हिमाचल में छह लोगों की अंतरात्मा जाग गयी तो कांग्रेस का टेंशन बढ़ गया। उत्तरप्रदेश में भी लोगों की अंतरात्मा जाग गयी तो अखिलेश यादव का दांव फेल कर गया। वैसे यूपी में इस एक दांव के फेल होने से अखिलेश यादव को फायदा हुआ यह नुकसान, यह तो चुनाव परिणाम ही बतायेगा। बगावत करने वाले नेताओं का बहुमत सवर्ण होने की वजह से समाज में कोई दूसरा ही संदेश गया है, जिसकी आहट सुनाई पड़ने लगी है।

देश भर में ईडी एक्टिव है और अब सुप्रीम कोर्ट को भी इसके विरोध को झेलना पड़ रहा है। इस बात का कोई उत्तर नहीं हैं कि जिनलोगों के खिलाफ खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आरोप लगाये थे, उनके भाजपा में जाते ही जांच क्यों रूक गयी। सच तो सभी की समझ में आ रहा है पर क्या करें। इसी बात पर एक फिल्मी गीत याद आने लगा है। फिल्म साजन के लिए इस गीत को लिखा था समीर ने और संगीत में ढाला था नदीम श्रवण की जोड़ी ने। इस गीत को कुमार सानू और अलका याग्निक ने अपना स्वर दिया था। गीत के बोल कुछ इस तरह हैं।

मेरा दिल भी कितना पागल है
ये प्यार तो तुमसे करता है (दो बार)
पर सामने जब तुम आते हो
पर सामने जब तुम आते हो
कुछ भी कहने से डरता है
ओ मेरे साजन.. ओ मेरे साजन..
साजन.. साजन.. मेरे साजन..

मेरा दिल भी कितना पागल है
ये प्यार तो तुमसे करता है..

कितना इसको समझाता हूँ
कितना इसको बहलाता हूँ (दो बार)
नादान है कुछ ना समझता है
दिन रात ये आहें भरता है

मेरा दिल भी कितना पागल है
ये प्यार तो तुमसे करता है (दो बार)
पर सामने जब तुम आते हो
पर सामने जब तुम आते हो
कुछ भी कहने से डरता है
ओ मेरे साजन.. ओ मेरे साजन..
साजन.. साजन.. मेरे साजन..
मेरा दिल भी..

हर पल मुझको तड़पाता है
मुझे सारी रात जगाता है (दो बार)
इस बात की तुमको ख़बर नहीं
ये सिर्फ तुम्ही पे मरता है

मेरा दिल भी कितना पागल है
ये प्यार तो तुमसे करता है (दो बार)
मेरा दिल भी कितना पागल है
ये प्यार तो तुमसे करता है
पर सामने जब तुम आते हो
पर सामने जब तुम आते हो
कुछ भी कहने से डरता है
ओ मेरे साजन.. ओ मेरे साजन..
साजन.. साजन.. मेरे साजन..
मेरा दिल भी..

हर दिन अडाणी साहब अमीर हो रहे हैं पर देश का मैंगो मैन गरीब हो रहा है। यह बात तो समझ में आ रही है। खुद मोदी जी भी देश के असली मुद्दों पर बोलने से कतराते हैं और हालत यह हो गयी कि भाजपा के लोग भी ऐसे सवालों से भाग जाते हैं। अब आम आदमी सवाल पूछे तो किससे पूछे। जो लोग पूछने वाले थे, वे सभी ईडी के लपेटे में आ रहे हैं। हेमंत सोरेन भी जेल में बंद है। आरोप है जमीन खरीदने का लेकिन जमीन का कागजी मालिक कोई और है, यह स्थापित सत्य है। अब पीएमएलए कानून ही कुछ ऐसा है कि जमानत नहीं मिल रही। दरअसल चुनाव के पहले विरोधी वोट एकजुट करने वाले सभी नेताओं को जेल में बंद करने का खेल तो समझ में आ रहा है पर मेरा दिल भी इतना पागल है कि बहुमत को यह बात समझ में ही नहीं आ रही है।

पश्चिम बंगाल के संदेशखाली पर बोलने के लिए नरेंद्र मोदी के पास वक्त है लेकिन इतने दिनों की हिंसा के बाद भी मणिपुर जाने की फुर्सत नहीं मिली है। अपना पुराना वादा निभाने के बदले हरियाणा और पंजाब की सीमा पर कीलें ठोंक दी गयी है। भाजपा के लोग इस पर भी बोलने के लिए तैयार नहीं है। विरोधी दल भी हैं तो जब जब से संगठित होने की कोशिश करते हैं, किसी न किसी की अंतरात्मा जाग जाती है और सब कुछ गुड़ गोबर हो जाता है। वइसे इतना सब कुछ देखकर यह तो साफ हो रहा है कि फिर एक बार मोदी सरकार का दावा भले ही सही साबित हो लेकिन अबकी बार चार सौ पार का नारा सही साबित नहीं होने जा रहा है। बार बार मूंड़ला बेल तले नहीं जाता है।