Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Bastar Accident News: दरभा और लोहंडीगुड़ा में सड़क दुर्घटनाओं का सिलसिला; असुरक्षित सफर बन रहा ग्राम... Mahasamund Crime News: गांजा तस्करी का मास्टरमाइंड गिरफ्तार; 10 माह से फरार आरोपी को ओडिशा से दबोचा Narayanpur News: अतिक्रमण हटाओ मुहिम में बवाल; बुलडोजर के नीचे लेटी महिला, नगर पालिका ने ढहाया दुकान... Chhattisgarh Monsoon Update: छत्तीसगढ़ में मानसून के लिए और करना होगा इंतजार; जानें क्या है मौसम विभ... Bastar Pride in Shimla: 71वीं अखिल भारतीय नृत्य प्रतियोगिता में बस्तर की बेटियों का डंका; जीता प्रथम... Surguja Murder Case: जमीन विवाद में खूनी संघर्ष; ट्रैक्टर से कुचलकर 60 वर्षीय बुजुर्ग की निर्मम हत्य... Kanker Diesel Crisis: कांकेर में गहराया डीजल संकट; पेट्रोल पंपों पर लगी लंबी कतारें, किसानों ने किया... Chhattisgarh Monsoon Session: विधानसभा के मानसून सत्र की तारीखों का ऐलान; 13 से 17 जुलाई तक चलेगा सत... Achievements of Modi Govt: मोदी सरकार के 12 साल बेमिसाल; गरीब कल्याण से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा तक मि... Sukma News: आंधी-तूफान प्रभावितों को एक महीने बाद भी नहीं मिला मुआवजा; कांग्रेस ने कलेक्टर को सौंपा ...

तरुवनवा में शुरू हुई बरना त्यौहार

  • बांध दिया ओखल-मूसल

  • जुटाया हरा चारा और लगै लाकडाउन

  • हरे पेड़ को नहीं पहुंचाया नुकसान

शिवा तिवारी

बगहा, प.च. : प्रखंड बगहा -2 की देवरिया तरुवानवा गांव में सन्नाटा पसरा है। घर-घर के लोग अपने घरों में कैद हैं। कंप्लीट लॉक डाउन का आलम है। हालांकि यह लॉक डाउन किसी आपदा का नतीजा नहीं, बल्कि आपदा से बचे रहने का उपक्रम है। दरअसल, तरुवानवा गांव में बरना नामक पारंपरिक अनुष्ठान शनिवार की दो बजे से शुरू हुआ है।

48 घंटे के इस अनुष्ठान का समापन सोमवार की शाम में होगा। अनुष्ठान के आरंभ में वनदेवी की विधिवत आराधना गांव के गुरो त्रिवेणी महतो ने की। थारू जनजाति समुदाय में गुरो की जिम्मेदारी आपदा से बचाव के लिए धार्मिक गतिविधियां संपन्न कराने की होती है। इसी प्रक्रिया के तहत पूरे गांव के लोग जहां वनदेवी की पूजा अर्चना में तल्लीन रहे,इस अवसर पर अगले 48 घंटे के दौरान किसी भी हरे पौधे को क्षति नहीं पहुंचाने का सामूहिक संकल्प भी गुरो ने ग्रामीणों से कराया।

बरना के दौरान आराधना में शामिल गुरो समेत डेगवहिया दीपू महतो, वीरेंद्र महतो, कमलेश पटवारी , श्रीकांत कुमार, गोपाल महतो, नरेश कुमार, पवन कुमार, विनोद ओजहिया आदि ग्रामीणों ने बताया कि मूलतः यह प्रकृति की पूजा का अनुष्ठान है। हरियाली के संरक्षण का पारंपरिक अनुष्ठान है।  जनजाति समुदाय का विश्वास है कि इस अनुष्ठान से

गांव की सीमा में किसी प्रकार का रोग का प्रवेश नहीं होता है। बरना शुरू होते ही डेगवाहक गांव के सिवान की निगरानी शुरू कर देते हैं, ताकि कोई भी व्यक्ति घर से बाहर या सरेह में नहीं निकले। अगर किसी ने विधान का उल्लंघन किया तो उसपर एक हजार रुपये का दंड लगाया जाता है। थरुहट के गांवों में यह परंपरा आदि काल से चली आ रही है। दंड की राशि में समय के अनुरूप परिवर्तन करने का अधिकार ग्रामीणों की सहमति से गुरो को होता है।

देवरिया तरुवानवा पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि संजय कुमार ओजहिया ने बताया कि बहुत ही खुशी बात है कि आज तरुवानवा गांव के वरना पूजा किया गया। यह सदियों से बरना का पूजा चलते आ रहा है। इस दौरान गांव के सभी बुद्धिजीवियों ने भाग लिया। जिसमें पूर्व सरपंच नन्दकिशोर महतो, प्रकाश गुरो, किशोर महतो, संजय ठिकदार, गुमस्ता चन्द्रशेखर महतो, मारकन्डे गुरो, प्रकाश गुरो, निरज ओजहिया, योगेन्द्र महतो, भण्डारी बैधनाथ महतो उपस्थित थे।