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चुम्मा वह भी हवाई पर बम जैसा फट गया है

चुम्मा वह भी हवाई यानी अंग्रेजी में फ्लाइंग किस ने अचानक से सुस्त पड़ी यूपी की राजनीति को गरमा दिया। हर बार राहुल गांधी पर जोरदार आरोप लगाने वाली स्मृति ईरानी इस बार खुद ही इस चुम्मा बम से घायल हो गयीं। अब बदलते समीकरणों में उन्हें इसका चुनावी लाभ मिलेगा या नुकसान होगा, यह देखने लायक बात होगी।

फिर भी अनेक वैज्ञानिक यह समझने और दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि दरअसल अगर वाकई राहुल ने फ्लाईंग किस किया भी था तो वह स्मृति ईरानी की तरफ नहीं था। आसन पर बैठे ओम बिड़ला की तरफ यह इशारा था। राहुल पर कैमरा फोकस नहीं रखने के अदृश्य निर्देश की वजह से टीवी पर इस कार्यवाही को देखने वाले साफ साफ कुछ नहीं देख पाये।

बाद में लोकसभा टीवी की तरफ से साफ किया गया कि ऐसी कोई घटना नहीं घटी थी। फिर भी मेरे जैसे कई शक्की लोग यह मानते हैं कि शायद इस घटना में हवाई चुंबन का परावर्तन हो सकता है। हमलोगों ने विज्ञान में पढ़ा था कि प्रकाश किरणों का परावर्तन कैसे होता है। किसी सतह से टकराने के बाद प्रकाश किरणें जिस तरीके से परावर्तित होकर समान कोण पर आगे बढ़ती है, तो क्या सामने बैठे लोकसभा अध्यक्ष ने टकराकर यह हवाई चुंबन दूसरी तरफ खड़ी स्मृति ईरानी की तरफ नहीं जा सकता है। गनीमत है कि लिखित शिकायत के तुरंत बाद ही भाजपा वाले इस मुद्दे पर हंगामा करने से पीछे हट गये क्योंकि असली मुद्दा तो मणिपुर था।

लोग सही कहते हैं कि समय खराब होता है तो रस्सी भी सांप बन जाता है। अभी भारतीय राजनीति में कुछ ऐसा ही चल रहा है। जिन मुद्दों को मुर्दा बताकर दबाया गया था, वे गाहे बगाहे कहीं न कहीं से फन काढ़कर खड़े हो रहे हैं। अब देखिये अडाणी मुद्दे को ठंडे बस्ते में डाला गया था तो उस कंपनी के ऑडिटरों के लगातार भाग जाने का मसला खड़ा हो गया। दूसरी तरफ सीएजी ने लगातार कई रिपोर्ट जारी कर इस मोदी सरकार के काम काज पर सवाल खड़े कर दिये। यह सब कुछ उस हवाई चुंबन के रिफ्लेक्ट होकर कहीं जा टकराने के बाद से हो रहा है।

इसी बात पर हिंदी फिल्म हम का यह गीत याद आने लगा है। इस गीत को लिखा था आनंद बक्षी ने और संगीत में ढाला था लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने। इसे खुद फिल्म के हीरो अमिताभ बच्चन ने अपना स्वर दिया था। गीत के बोल कुछ इस तरह हैं

जुम्मा, जुम्मा, जुम्मा, जुम्मा, जुम्मा

जुम्मा, जुम्मा जुम्मा जुम्मा जुम्मा जुम्मा जुम्मा

अरे ओ जुम्मा, मेरी जानेमन, बाहर निकल

आज जुम्मा है, आज का वादा है

देख मैं आ गया, तू भी जली आ

मुझे मत और तड़पा

अरे तू बोली थी पिछले जुम्मे को

चुम्मा दूंगी अगले जुम्मे को

आज जुम्मा है तो आजा आजा

जुम्मा चुम्मा दे दे,  जुम्मा चुम्मा दे दे चुम्मा

जुम्मे के दिन किया चुम्मे का वादा

जुम्मे को तोड़ दिया चुम्मे का वादा

ले आ गया रे फिर जुम्मा-चुम्मा …

जुम्मे के बदले में, क्या दोगे बोलो तो

लेना क्या, देना क्या, लेना क्या, देना क्या

लेना क्या लेना क्या, चुम्मा दो …

मैं कुछ न दूंगा इससे ज़्यादा चुम्मा

चुम्मा दे दे,  जुम्मा चुम्मा दे दे चुम्मा   …

कर तो न चुम्मे जवर जुम्मा

चुम्मा न दे,  जुम्मा चुम्मा न दे चुम्मा

जुम्मा चुम्मा दे दे,  जुम्मा चुम्मा दे दे चुम्मा

मैं तेरा जी भर दूँ सोचा था हाँ कर दूँ

फिर काहे फिर काहे ना कर दी,  ना कर दी

फिर काहे ना कर दी

मैं सद के जान कर दूँ

मैं ने बदल दिया इरादा जुम्मा

चुम्मा न दे,  जुम्मा चुम्मा ना दे चुम्मा …

इसलिए लोकसभा चुनाव के पहले हो रही खेमाबंदी में इस किस्म के शह मात का खेल तो अभी और तेज होता ही चला जाएगा। लेकिन यह बात माना जाना चाहिए कि भारत जोड़ो यात्रा ने देश में राहुल गांधी की राजनीतिक छवि को बदलकर रख दिया है। राहुल गांधी के शब्दों में उन्हें नकारा साबित करने के पीछे भाजपा ने जो हजारों करोड़ रुपये खर्च किये थे, वह पूरा का पूरा पानी में चला गया है।

अब खुद भाजपा अपनी ही बोयी फसल काटने में अपने ही हाथों को घायल कर रही है। ईडी का बड़ा सहारा था लेकिन लगता है अब भाई लोग ईडी से भी डरना छोड़ चुके हैं और अब इसी एजेंसी को चुनौती देने लगे हैं। एक तरफ अभिषेक बनर्जी और दूसरी तरफ हेमंत सोरेन, इंडिया गठबंधन के दो युवा नेताओं ने ऐसा कर दिखाया है। ईडी के अंदर भी शायद इस पर माथापच्ची चल रही है कि वर्तमान निदेशक का कार्यकाल अगले माह की पंद्रह तारीख को समाप्त होने के बाद क्या होगा। वैसे भी इन एजेंसियों में भी शीर्ष पदों पर कोई कम घमासान नहीं होता है। चुनाव में जनता किसका सर चुमेगी, यही असली टेंशन है।