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मोरहाबादी में 16वां बांग्ला सांस्कृतिक मेला शुरू

रांची: बांग्ला सांस्कृतिक मेला, प्रवासी भारतीयों में बंगाली भाषियों के जीवन का उत्सव, कल रात एक शुभ शुरुआत हो गया। रामकृष्ण मिशन आश्रम, मोरहाबादी के संपादक भावेशानंद महाराज ने शुक्रवार को रांची के मोरहाबादी स्थित पद्मश्री डॉ। रामदयाल मुंडा खेल परिसर में तीन दिवसीय मेले का उद्घाटन किया।

उन्होंने सभी बंगाली भाषियों को उनकी संस्कृति के साथ उनके आध्यात्मिक जुड़ाव की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज के अस्तित्व के लिए संस्कृति सबसे जरूरी है। उन्होंने मेले के आयोजन के लिए बंगाली जुबो मंच के सदस्यों को बधाई दी। मंच संयोजक सुप्रिया भट्टाचार्य ने सांस्कृतिक मेले का इतिहास बताया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष 16वां मेला आयोजित किया जा रहा है।

विगत कुछ वर्षों से कोविड एवं अन्य अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण मेले का आयोजन संभव नहीं हो सका था। मंच के अध्यक्ष सिद्धार्थ घोष ने सभी से कार्यक्रम में शामिल होने का आग्रह किया। इसके बाद माइकल मधुसूदन दत्ता एक के बाद एक स्टेज पर आते गए। कोलकाता के डांसर्स गिल्ड द्वारा अपनी प्रस्तुति मौजूद लोगों के समक्ष रखी गयी।

जोनाकी सरकार के नृत्य निर्देशन में रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ। मंजुश्री ने किया। रवींद्र संगीत की धुन से नर्तकियों की ताल और ताल ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। संगीत आलोक रॉय चौधरी और शितांगशु मजुमदार द्वारा निर्देशित है। पार्वती गुप्ता प्रभारी थीं। तत्पश्चात कोलकाता के एक कलाकार का नाटक एक जे छिलो सुखीराम प्रस्तुत किया गया। हास्य से भरपूर नाटकों में ग्रामीण बंगाल की एक विशेष विधा देखी जा सकती है।

मंच पर अभिनेताओं और अभिनेत्रियों के साथ-साथ संगीतकारों को भी जगह दी जाती है। नाटक में दिखाया गया है कि कैसे एक आलसी युवक दूसरों के प्रोत्साहन से जीवन में स्थापित हो जाता है। नाटक का निर्देशन पल्लब बोस ने किया था। शक्ति चक्रवर्ती संगीत निर्देशक थे। लाइटिंग शशांक मंडल ने की और आवाज सुशील कांति, दलिया प्रमाणिक और सरिता मंडल ने दी। कार्यक्रम का समापन कबीर के गीत से हुआ। पूरे कार्यक्रम के संचालक जमशेदपुर के बाचिक कलाकार सब्यसाची चंद थे।

इससे पहले सांस्कृतिक मेलों की परंपरा को कायम रखते हुए उलुध्वनि व शंखध्वनि प्रतियोगिताएं भी हुई। इसमें महिलाएं लाल और सफेद साड़ी पहनती हैं और शंख बजाते हुए मेला मैदान की परिक्रमा करती हैं। शनिवार को मेले का मुख्य आकर्षण बांग्ला आर्केस्ट्रा होगा। रविवार को मेले का समापन बैंड वादन के साथ होगा। मेले को सुचारू रूप से चलाने में बिस्वजीत भट्टाचार्य, अभिजीत भट्टाचार्य, पपलू, डॉ पोम्पा सेन विश्वास ने विशेष सहयोग किया।