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ईडी की आज की छापामारी कई रिटायर्ड पर गाज गिरा सकती है

  • ठेका और पट्टा के मामलों का खुलासा होगा

  • कमजोर कड़ी है जो दबाव में टूट सकती है

  • आईएएस पर दबाव डालना आसान नहीं होता

राष्ट्रीय खबर

रांचीः रिटायर्ड अफसरों के जरिए कमिशनखोरी का राज शायद अब खुल सकता है। ईडी द्वारा एक पीपीएस के यहां हुई छापामारी में अगर सही सूचनाएं बाहर आ गयीं तो वैसे अधिकारी पहली बार निशाने पर आ जाएंगे, जो अब तक बचे हुए हैं। ईडी अथवा सरकार में बैठे लोगों को भले ही इस बात की जानकारी नहीं हो लेकिन आम जनता के बीच यह चर्चा काफी पहले से है कि ऐसे सेवानिवृत्त अधिकारी ही कई लोगों के लिए एटीएम मशीन बने रहे हैं।

दरअसल इससे पहले कई आइएएस अफसरों की जांच और उनसे पूछताछ हुई है। यह पहला अवसर है जब ईडी ने मुख्यमंत्री कार्यालय के पीपीएस के आवास पर छापा मारा है। जानकार बताते हैं कि आम तौर पर किसी आईएएस अधिकारी के साथ जांच टीम के द्वारा सख्ती नहीं की जा सकती। दूसरी तरफ छोटे संवर्ग के अधिकारियों पर दबाव डालना अपेक्षाकृत सहज होता है।

चर्चा इस बात की भी है कि अगर इस राज्य में ठेका पट्टा में लोगों को मनमाफिक काम दिलाने की पैरवी में जो कमिशनखोरी है, उसकी बंदरबांट एक जगजाहिर बात है। कुछ रिटायर्ड अधिकारियों ने कहा कि अगर ऐसे कनीय संवर्ग का अधिकारी ईडी की दबाव में टूट गया तो वह खास तौर पर उन सेवानिवृत्त अफसरों का नाम सबसे पहले लेगा, जिनसे वह नियमित संपर्क में होता था।

ऐसे सारे अधिकारी अपने मूल विभाग से रिटायर होने के बाद राज्य सरकार की विभिन्न एजेंसियों में महत्वपूर्ण पदों पर आसीन है। दूसरी बात यह है कि इन रिटायर्ड अधिकारियों को भी गिरफ्त में लेना ईडी के लिए कोई कठिन चुनौती नहीं होगी। वैसे ठेकेदारी की जानकारी रखने वाले सूत्रों का कहना है कि ऐसे रिटायर्ड अफसरों की जानकारी तो शायद ईडी को पहले ही मिल गयी होगी क्योंकि प्रेम प्रकाश से प्रवर्तन निदेशालय पहले ही पूछताछ कर चुकी है। झारखंड में टेंडर का खेल लगभग सभी विभागों में होता है। ऐसे में अपने ही सगे संबंधियों के नाम पर कारोबार करने वाले ऐसे रिटायर्ड अथवा सेवारत अधिकारियों पर गाज गिरने की सबसे अधिक संभावना है।