बीस जुलाई के संसद मार्च के दौरान पुलिस हिंसा पर कार्रवाई
पुलिस ने पहले इंकार कर दिया था
दस्तावेजी सबूत बाद में सामने आये
अत्यधिक हिंसा की शिकायत की जांच
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः नीट पेपर लीक विरोध प्रदर्शनों के दौरान जुलाई में दिल्ली के जंतर-मंतर और राष्ट्रीय राजधानी के बाहर हुई हिंसा की घटनाओं की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त समिति पैलेट गन के इस्तेमाल, लक्षित हिंसा और महिला प्रदर्शनकारियों के उत्पीड़न, तथा दोनों पक्षों की ओर से हुई अत्यधिक हिंसा और संपत्ति के विनाश से संबंधित मामलों को प्राथमिकता देगी।
गृह मंत्रालय के एक बयान में कहा गया कि प्रभावित पुलिसकर्मियों सहित प्रभावित लोगों की सुविधा के लिए, उच्च-स्तरीय जांच समिति ने एक पोर्टल लॉन्च किया है। बयान में कहा गया, यह कमिटी सुप्रीम कोर्ट के 18 अगस्त 2026 के आदेश के पैराग्राफ 12 और 13 तथा 10 सितंबर, 2026 के आदेश के पैराग्राफ 5(i) में उल्लिखित सभी मुद्दों की जांच करेगा। पैलेट गन के इस्तेमाल, लक्षित हिंसा और महिला प्रदर्शनकारियों के उत्पीड़न, तथा दोनों पक्षों की ओर से हुई अत्यधिक हिंसा और संपत्ति के विनाश से संबंधित मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी।
21 जुलाई को सबसे पहले यह खबर आयी थी कि कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा संसद की ओर बुलाए गए 20 जुलाई के मार्च के दौरान, जो हिंसक हो गया था, रैपिड एक्शन फोर्स के दंगा-रोधी उपकरणों में शामिल पैलेट गन से कम से कम एक प्रदर्शनकारी घायल हो गया था। बाद में, तीन अन्य पीड़ितों ने कहा कि उन्हें पंप एक्शन गन से आमतौर पर दागे जाने वाले पैलेट लगे थे।
हालांकि दिल्ली पुलिस ने पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार किया था, लेकिन संसद स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में दर्ज एक जनरल डायरी प्रविष्टि से पता चला कि पुलिस के एक पुलिस उपायुक्त रैंक के अधिकारी के निर्देश पर रैफ ने दंगा-रोधी गन से दो राउंड फायर किए थे। इस प्रदर्शन में कम से कम 80 प्रदर्शनकारी घायल हुए थे और पुलिसकर्मियों द्वारा महिलाओं के साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न किया गया था। इस पर विपक्ष द्वारा यह सवाल उठाए जाने कि विरोध प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया था, संसद के मानसून सत्र में काफी हंगामा हुआ।
पोर्टल को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह कमजोर गवाहों को उचित सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ, यदि प्रभावित व्यक्ति चाहें तो उनकी पहचान को गोपनीय और गुप्त रख सके। इसमें कहा गया है कि प्रभावित लोगों और अन्य हितधारकों को पोर्टल पर जाने तथा लागू प्रारूपों का उपयोग करते हुए अपनी शिकायतें/प्रतिनिधित्व अपलोड करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।