मोटापा दूर करने की नई तकनीक शीघ्र लागू हो जाएगी
सर्जरी की जरूरत ही खत्म होगी
दूसरी दवाओं से अधिक कारगर है
क्लीनिकल ट्रायल का दूसरा दौर जारी
राष्ट्रीय खबर
रांचीः मोटापे से जूझ रहे लोगों के लिए एक राहत भरी खबर है। एक प्रायोगिक इंजेक्शन, जो वसा (फैट) कोशिकाओं को स्वयं नष्ट होने के लिए प्रेरित करता है, के शुरुआती मानव परीक्षणों में बेहद आशाजनक परिणाम सामने आए हैं। यह इंजेक्शन पेट के भीतर गहराई में मौजूद खतरनाक वसा को काफी हद तक कम करता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह उपचार अंततः मोटापे से निपटने का एक नया तरीका बन सकता है और लोकप्रिय वेट-लॉस दवाओं को बंद करने के बाद भी लोगों को वजन बनाए रखने में मदद कर सकता है।
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सीबीएल-514 नाम की इस दवा को इटली के मिलान में यूरोपियन एसोसिएशन फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज की वार्षिक बैठक में प्रस्तुत किया गया। शोध से पता चलता है कि यह त्वचा के ठीक नीचे मौजूद वसा (सबक्यूटेनियस फैट) और आंतरिक अंगों को घेरने वाली खतरनाक वसा (विसेरल फैट) दोनों को कम कर सकती है। अलबामा विश्वविद्यालय के डॉ. डब्ल्यू. टिमोथी गार्बी के अनुसार, यह दवा ऑज़ैम्पिक, वेगोवी और मौनजारो जैसी दवाओं को बंद करने के बाद फिर से वजन बढ़ने की समस्या को रोक सकती है। हालांकि, इंसानों में इसकी पुष्टि होना अभी बाकी है।
सीबीएल-514 दवा साधारण दवाओं की तरह फैट कम करने के बजाय वसा कोशिकाओं को एपोप्टोसिस (प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया) के जरिए स्वयं नष्ट कर देती है। यह दवा शरीर की अन्य स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाए बिना केवल वसा कोशिकाओं (एडीपोसाइट्स) को निशाना बनाती है। फेज-2 क्लीनिकल ट्रायल में 8 हफ्तों के बाद सीबीएल-514 से इलाज कराने वाले 69.6 फीसद प्रतिभागियों की त्वचा के नीचे की वसा में कम से कम 150 मिलीलीटर की गिरावट देखी गई। खतरनाक पेट की वसा में 10 प्रतिशत से अधिक की कमी देखी गयी।
आंतरिक अंगों जैसे लिवर और आंतों के आसपास जमा होने वाली विसेरल फैट टाइप-2 डायबिटीज, इंसुलिन रेजिस्टेंस और दिल के दौरों का मुख्य कारण बनती है। ताइवान की कैलीवे बायोफार्मास्युटिकल्स द्वारा 41 प्रतिभागियों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि अंतिम इंजेक्शन के 4 हफ्ते बाद, सीबीएल-514 लेने वाले प्रतिभागियों के विसेरल फैट में औसतन 12.01 प्रतिशत की कमी आई, जबकि प्लेसिबो समूह में यह 5.68 फीसद बढ़ गया। इलाज के 8 से 12 हफ्तों बाद भी इस फैट में 10.45 फीसद की कमी बरकरार रही।
सर्जरी या लाइपोसुक्शन केवल त्वचा के नीचे की वसा हटाते हैं, जबकि यह इंजेक्शन बिना किसी बड़ी सर्जरी के पेट के गहरे फैट को खत्म करता है। परीक्षण के दौरान इंजेक्शन वाली जगह पर हल्का दर्द या सूजन जैसे मामूली लक्षण ही देखे गए। हालांकि यह अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन शोधकर्ता इसे मोटापे के इलाज में एक क्रांतिकारी कदम मान रहे हैं।
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