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हमारे मुंह में शब्द ना ठोंकेः सुप्रीम कोर्ट

फॉर्म छह के विवाद पर बयानबाजी के बाद प्रतिक्रिया

आगामी 27 को होगी सुनवाई

इस पर कभी कोई निर्णय नहीं दिया

सीईसी ने मान्यता का बयान दिया था

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः सोमवार को उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि उसने भारतीय निर्वाचन आयोग के नए फॉर्म 6 की वैधता पर कभी कोई न्यायिक निर्णय नहीं दिया है। फॉर्म 6 वह वैधानिक आवेदन पत्र है जिसका उपयोग देश के नागरिक मतदाता सूची में अपना नाम पंजीकृत कराने के लिए करते हैं। अदालत ने इस बात पर विशेष रूप से जोर दिया कि जब वह इस वर्ष की शुरुआत में बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई कर रही थी, तब यह संशोधित रूप अस्तित्व में ही नहीं था।

यह स्पष्टीकरण भारत के निर्वाचन आयोग के उस दावे के बाद पैदा हुए विवाद के बीच आया है जिसमें ने तर्क दिया था कि सुप्रीम कोर्ट ने बिहार एसआईआर अभ्यास के लिए फॉर्म 6 से जुड़े एक घोषणा पत्र (डिक्लेरेशन) को बरकरार रखा था। इस पर शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि उसकी पिछली टिप्पणियों को किसी भी संशोधित फॉर्म के न्यायिक समर्थन या उसे खारिज किए जाने के रूप में नहीं देखा जा सकता।

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सोमवार को एक नई रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। पीठ ने वकील से कहा, इस अदालत द्वारा की गई टिप्पणियां संवैधानिक न्याय निर्णयन के समान नहीं हैं। नए फॉर्म 6 पर कोई फैसला नहीं हुआ है और हमने केवल इतना ही कहा है। पीठ ने सख्त लहजे में आगे जोड़ा, चाहे वह स्वीकृत हो या अस्वीकृत… वह उस समय अस्तित्व में नहीं था। हमारे मुंह में शब्द मत डालिए।

मामले की स्पष्टता को बढ़ाते हुए न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि 5 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणियों का अर्थ केवल यह था कि जब अदालत ने बिहार एसआईआर पर अपना फैसला सुनाया था, तब यह संशोधित फॉर्म मौजूद नहीं था। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट ने इसे मंजूरी दी थी या खारिज किया था।

अदालत ने कहा कि अब जब यह मामला उसके संज्ञान में लाया गया है, तो वह इस पर गहन विचार करेगी। पीठ ने निर्देश दिया कि इस मामले को 27 अक्टूबर को एसआईआर से संबंधित याचिकाओं के मुख्य समूह के साथ सूचीबद्ध किया जाए, जहां वह निर्वाचन आयोग के कामकाज और मतदाता सूची पुनरीक्षण अभ्यास से जुड़े निर्णयों की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर भी सुनवाई करेगी।