कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं ने सरकार पर लगाए आरोप
फोन जब्ती की सूची तक नहीं दी
यह आपातकाल जैसी हालत हो गयी
सरकार क्यों ज्ञानेश को बचा रही है
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः नई दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं आशुतोष रांका और सौरभ दास ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस दिल्ली की एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा 50,000 रुपये के मुचलके पर रिहा किए जाने के कुछ ही घंटों बाद आयोजित की गई। इस दौरान दोनों नेताओं ने केंद्र सरकार पर देश को गृहयुद्ध की ओर धकेलने का गंभीर आरोप लगाया।
सौरभ दास ने सरकार पर उनके फोन को क्लोन और हैक करने का आरोप लगाते हुए आशंका जताई कि पुलिस उनके उपकरणों में ऐसे फर्जी सबूत प्लांट कर सकती है, जिनका इस्तेमाल भविष्य में उनके खिलाफ किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि जब उनके फोन छीने गए, तब उन्हें जब्ती का कोई आधिकारिक मेमो नहीं दिया गया था। दास ने आरोप लगाया कि देश में 1975 जैसी आपातकाल की स्थिति पैदा कर दी गई है। वहीं, रिहाई के बाद अभिजीत दिपके शनिवार को अपनी दादी के निधन के कारण परिवार के पास महाराष्ट्र रवाना हो गए।
सौरभ दास ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने जबरन विमान में घुसकर उनका अपहरण किया और उन्हें हिरासत में लेने का कोई औपचारिक नोटिस नहीं दिया गया। उनके फोन जब्त कर लिए गए और वकीलों से संपर्क नहीं करने दिया गया।
दास ने आशंका जताई कि अन्य कार्यकर्ताओं की तरह उनके फोन भी हैक या क्लोन किए गए हैं, ताकि भविष्य में फर्जी दस्तावेज या अन्य सामग्री बतौर सबूत पेश की जा सके।
देश में डर का माहौल बनाया जा रहा है और यह सब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए किया जा रहा है। बेल की शर्त पर रिहा हुए सौरभ दास ने कहा कि पुलिस ने एक साल तक शांति भंग न करने की बात कही है, जबकि असल में शांति भंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और ज्ञानेश कुमार ने की है। उन्होंने सवाल किया कि सरकार ज्ञानेश कुमार को क्यों बचाना चाहती है।
आशुतोष रांका ने दिल्ली पुलिस के रवैये को अमानवीय बताया। उन्होंने कहा कि जब अभिजीत को उनकी दादी के निधन की दुखद खबर दी गई, तब पुलिसकर्मी कैमरे और माइक लेकर खड़े थे और एक निजी पारिवारिक शोक को तमाशा बनाने की कोशिश कर रहे थे।
इससे पहले रविवार को सीजेपी के कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने बताया कि अदालत ने तीनों नेताओं को इस शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया कि वे एक साल तक किसी भी तरह की शांति भंग गतिविधि में शामिल नहीं होंगे।