सीजेपी और राहुल के आरोपों के बाद नया राजनीतिक पेंच
सीजेपी की चेतावनी के एक दिन पूरे
राहुल ने कहा है बाद में भी कार्रवाई होगी
अब तक मूल आरोपों का जवाब नहीं आया
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: देश की राजनीति में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली को लेकर घमासान मचा हुआ है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी के आरोप लगाए और सीईसी के इस्तीफे की मांग की। इसके साथ ही, कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी तीखा हमला बोलते हुए विपक्षी दलों से ऐसे चुनावों का बहिष्कार करने का आह्वान किया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है।
विपक्षी दलों और अन्य संगठनों द्वारा चुनाव आयोग पर लगातार उठाए जा रहे सवालों के बीच, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने बचाव का रुख अपनाते हुए कहा है कि चुनाव आयोग को किसी भी कीमत पर जनता के भरोसे को बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि आयोग को उठ रहे तमाम सवालों पर मजबूती से और खुलकर अपना पक्ष रखना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार का संशय न बचे। चिराग ने यह भी कहा कि विपक्ष का काम राजनीति करना है, इसलिए उनके बयानों से बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ता; परंतु जब आम जनता के मन में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और शुचिता को लेकर जरा भी शक पैदा होने लगे, तो यह एक गंभीर विषय बन जाता है। ऐसे में यह आयोग और खासकर की नैतिक जिम्मेदारी है कि वे हर संदेह का स्पष्ट और ठोस समाधान दें।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की वोटिंग व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुनियोजित तरीके से नुकसान पहुंचाया गया है। राहुल गांधी ने दावा किया कि 2024 का लोकसभा चुनाव पूरी तरह से फर्जी था और चुनावी व्यवस्था में गंभीर स्तर पर धांधली की गई है।
इस राजनीतिक विवाद में कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके भी कूद पड़े हैं। उन्होंने भी सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की जोरदार मांग की है। दिपके ने विपक्षी दलों को सलाह दी कि यदि उन्हें वास्तव में यह लगता है कि देश में चुनाव पूरी तरह से धांधली और फिक्सिंग के आधार पर हो रहे हैं, तो उन्हें ऐसे चुनावों का हिस्सा बनना बंद कर देना चाहिए। उनके अनुसार, कथित तौर पर धांधली से भरे चुनावों में लगातार भाग लेना उन चुनावों को वैधानिक रूप देने जैसा है।
दिपके ने आगे कहा कि विपक्षी दल चुनावी गड़बड़ी का मुद्दा केवल उन राज्यों या मौकों पर नहीं उठा सकते जहाँ उन्हें अपना राजनीतिक फायदा दिखाई देता है। यदि प्रक्रिया में कोई खोट या धांधली है, तो हर राज्य और हर पार्टी के मामले में रुख एक जैसा होना चाहिए। उन्होंने मौजूदा चुनावी व्यवस्था की तुलना एक ‘फिक्स क्रिकेट मैच’ से करते हुए दावा किया कि कुछ सीटें या जीत विपक्ष को केवल इसलिए दे दी जाती हैं ताकि मुकाबला असली और पारदर्शी दिखाई दे। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे जंतर-मंतर 2.0 आंदोलन शुरू करेंगे।