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नीट-यूजी विरोध प्रदर्शन मामले में मजिस्ट्रेट निलंबित

सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के तुरंत बाद एक्शन में योगी सरकार

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारत के सॉलिसिटर-जनरल तुषार मेहता ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया कि जंतर-मंतर पर हुए नीट-यूजी विरोध प्रदर्शनों के सिलसिले में गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के एक छात्र को कारण बताओ नोटिस जारी करने वाले ग्रेटर नोएडा कमिश्नरेट के एक कार्यपालक दंडाधिकारी को निलंबित कर दिया गया है। इस दंडाधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट के उस स्पष्ट आदेश के तीन दिन बाद यानी 4 सितंबर को यह नोटिस जारी किया था, जिसमें छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई गई थी।

शीर्ष अदालत ने 9 सितंबर को अक्षत त्रिपाठी नामक छात्र को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 130 के तहत निवारक कार्यवाही के संबंध में नोटिस जारी किए जाने पर अपनी कड़ी नाराजगी व्यक्त की थी। श्री त्रिपाठी को कॉकरोच जनता पार्टी के प्रस्तावित धरने में साथी छात्रों को ‘भड़काने’ के आरोप में 5 लाख रुपये का व्यक्तिगत मुचलका और दो ज़मानतदार पेश करने के लिए कहा गया था।

मुख्य न्यायाधीश कांत ने मौखिक रूप से यह टिप्पणी की थी कि दंडाधिकारी के पास ऐसा नोटिस जारी करने का कोई अधिकार नहीं था, जबकि अदालत पहले ही एफआईआर को रद्द कर चुकी थी और यह निर्देश दे चुकी थी कि किसी भी छात्र के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा था कि आदेश की भाषा बहुत स्पष्ट थी जिसे कोई भी आम आदमी आसानी से समझ सकता था।

यह पूरा मामला नीट-यूजी प्रश्न पत्र लीक के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा है, जिनमें बड़ी संख्या में छात्र शामिल थे। 1 सितंबर को दिए गए सुप्रीम कोर्ट के आदेश में इन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया गया था और छात्रों के खिलाफ किसी भी नई एफआईआर दर्ज करने पर भी रोक लगा दी गई थी।