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नेपाल आपदा: ‘3 घंटे की देरी और बीमारी बनी जीवनदान’; पुणे तहसीलदार स्मिता पवार सुरक्षित लौटीं, महाराष्ट्र के 64 लोग अब भी लापता

पुणे (महाराष्ट्र): नेपाल में मूसलाधार बारिश के बाद आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन की भयावह त्रासदी के बीच महाराष्ट्र के कई तीर्थयात्रियों के लापता होने से चिंता बनी हुई है।

इसी बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गईं पुणे जिले की तहसीलदार स्मिता प्रदीप पवार सुरक्षित अपने घर लौट आई हैं। उन्होंने कैमरे के सामने भावुक होते हुए नेपाल में बिताए उन रोंगटे खड़े कर देने वाले पलों को साझा किया। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान अचानक तबीयत खराब होना और सांस लेने में तकलीफ होना ही उनके लिए वरदान साबित हुआ और उनकी जान बच गई।

🫁 चीन सीमा से 4 किमी पहले बिगड़ी तबीयत: सांस लेने में हुई दिक्कत बनी ढाल

घटनाक्रम और जीवन रक्षक मोड़:

  • मानसरोवर यात्रा पर गई थीं: स्मिता पवार अपने 3 अन्य साथियों के साथ कैलाश मानसरोवर की पावन यात्रा के लिए नेपाल के रास्ते रवाना हुई थीं।

  • बॉर्डर से पहले रुकीं: चीन सीमा की ओर चढ़ाई करते समय पहाड़ी इलाके में अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और उन्हें सांस लेने में अत्यधिक परेशानी होने लगी।

  • रूट पर रुकना पड़ा: हालत गंभीर होने के कारण उन्हें चीन सीमा से महज 4 किलोमीटर पहले ही रोक दिया गया। यदि वे पूरी तरह स्वस्थ होतीं और बाकी यात्रियों के साथ आगे बढ़ जातीं, तो सीधे लैंडस्लाइड और सैलाब के केंद्र में फंस जातीं।

⏳ हेल्थ सर्टिफिकेट की 3 घंटे की देरी ने बचाई जिंदगी: आगे बढ़ा ग्रुप बाढ़ में बहा

समय का चक्र और खौफनाक संयोग:

  • प्रक्रियागत देरी: आगे की यात्रा और वापसी की अनुमति हेतु मेडिकल/हेल्थ सर्टिफिकेट बनवाने में करीब 3 घंटे का समय लग गया।

  • आगे वाला ग्रुप सैलाब में फंसा: उसी 3 घंटे की देरी के दौरान उनके आगे चल रहा दूसरा जत्था अचानक आई भीषण बाढ़ की चपेट में आ गया।

  • जिंदगी का टर्निंग पॉइंट: स्मिता ने भावुक होकर कहा कि उन्हें तनिक भी अंदाजा नहीं था कि मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाने में हुई कुछ घंटों की यह देरी उनके जीवन की सबसे बड़ी ढाल बन जाएगी।

💔 ‘साथ नाश्ता करने वाले 5-6 लोग बाढ़ में बह गए’: आंखों में आंसू लिए बयां किया दर्द

त्रासदी का प्रत्यक्षदर्शी विवरण:

  • दिल दहला देने वाला मंजर: स्मिता पवार ने बताया कि जिस पड़ाव पर वे रुकी थीं, वहां उनके साथ कुछ अन्य यात्री भी मौजूद थे।

  • साथियों की मौत: जिन 5 से 6 लोगों के साथ उन्होंने कुछ देर पहले बैठकर नाश्ता किया था, वे आगे बढ़ते ही तेज सैलाब में बह गए और उनकी दर्दनाक मौत हो गई।

  • भोलेनाथ की कृपा: उन्होंने इसे भगवान भोलेनाथ की असीम कृपा बताते हुए कहा कि बीमारी के कारण रुकना ही उनके जीवित लौटने का एकमात्र कारण बना।

🔍 महाराष्ट्र के 404 में से 64 लोग अभी भी लापता: राहत व बचाव अभियान जारी

लापता लोगों की स्थिति और प्रशासनिक आंकड़े:

  • डिजास्टर कंट्रोल रूम का डेटा: राज्य आपदा नियंत्रण कक्ष के अनुसार, महाराष्ट्र से कुल 404 लोग नेपाल यात्रा पर गए थे।

  • 64 लोगों से संपर्क टूटा: इनमें से 64 नागरिकों से अभी तक कोई संपर्क नहीं हो सका है और उनके परिजन लगातार जानकारी जुटा रहे हैं।

  • खोजबीन में जुटी टीमें: भारत और नेपाल की संबंधित एजेंसियां लापता यात्रियों को खोजने और नेटवर्क कटने वाले क्षेत्रों में संपर्क साधने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।