रायपुर IGKV में तीसरा पेपर भी लीक: ‘फंडामेंटल्स ऑफ जेनेटिक्स’ परीक्षा पर बवाल, यूनिवर्सिटी ने पुलिस को भेजा जांच पत्र
रायपुर (छत्तीसगढ़): इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) में पेपर लीक होने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब विश्वविद्यालय में तीसरा पेपर लीक होने का गंभीर मामला सामने आया है।
यह प्रकरण 19 अगस्त को आयोजित हुई बीएससी फर्स्ट ईयर (B.Sc. 1st Year) के ‘फंडामेंटल ऑफ जेनेटिक्स’ (Fundamentals of Genetics) विषय की मुख्य परीक्षा से जुड़ा है। प्रारंभिक दौर में पुख्ता साक्ष्य न होने की बात कही जा रही थी, किंतु अब आंतरिक जांच के आधार पर विश्वविद्यालय प्रबंधन ने कड़ा रुख अपनाते हुए रायपुर के तेलीबांधा थाने को अग्रिम विधिक जांच हेतु औपचारिक पत्र प्रेषित कर दिया है।
🔍 5 सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट: प्रश्न पत्र के सीलबंद लिफाफे से छेड़छाड़
विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच और खुलासे:
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जांच समिति का गठन: मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रबंधन ने 5 सदस्यीय विशेष जांच समिति का गठन किया था।
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छेड़छाड़ की पुष्टि: समिति के प्राथमिक परीक्षण में यह बात प्रमाणित हुई कि संबंधित प्रश्न पत्र के गोपनीय लिफाफे के साथ अनधिकृत छेड़छाड़ की गई थी।
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जांच का दायरा: परीक्षा नियंत्रक ने पुलिस प्रशासन से अनुरोध किया है कि इस नए प्रकरण को भी पूर्व से दर्ज आपराधिक विवेचना में शामिल कर समग्र जांच की जाए।
👮 दुर्ग के प्रोफेसर सहित 6 आरोपी पहले ही गिरफ्तार, पुलिस ने शुरू की कड़ियां जोड़ना
पुलिस कार्रवाई और कानूनी स्थिति:
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पूर्व की एफआईआर: इससे पहले 7 अगस्त और 20 अगस्त को आयोजित परीक्षाओं के पेपर लीक होने के संबंध में तेलीबांधा थाने में दो अलग-अलग आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं।
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आरोपियों की गिरफ्तारी: पुलिस ने 22 अगस्त को दुर्ग स्थित कृषि महाविद्यालय के एक प्रोफेसर सहित कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा था।
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थाना प्रभारी का बयान: तेलीबांधा थाना प्रभारी अजय झा ने बताया कि वर्तमान में दो पेपर लीक की आधिकारिक FIR दर्ज है, किंतु विश्वविद्यालय से प्राप्त जांच पत्र और तथ्यों के आधार पर तीसरे मामले की भी कड़ियों को जोड़ते हुए कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
📢 जनसंपर्क अधिकारी का पक्ष: “साक्ष्य मिलने के बाद ही पुलिस के सुपुर्द किया केस”
विश्वविद्यालय प्रशासन का आधिकारिक बयान:
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मीडिया रिपोर्ट पर संज्ञान: विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) संजय नैयर ने बताया कि 19 अगस्त की परीक्षा को लेकर शुरू में जब खबरें आई थीं, तब प्रबंधन के पास ठोस दस्तावेजी प्रमाण उपलब्ध नहीं थे।
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पारदर्शी जांच: प्रबंधन ने आंतरिक जांच पूरी होने तक स्थिति पर नजर बनाए रखी।
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सख्त कदम: जांच समिति द्वारा लिफाफे में गड़बड़ी की पुष्टि किए जाने के तुरंत बाद ही पूरे मामले को निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस प्रशासन को सौंप दिया गया है।
