दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली के लिए नया निर्देश जारी कर दिया
बस्तियों के साढ़े तीन सौ परिवार
वैकल्पिक स्थानों पर चले जाएं वे
छह महीने तक इसकी निगरानी होगी
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः दिल्ली हाईकोर्ट की एक पीठ ने रेस कोर्स क्षेत्र स्थित प्रधानमंत्री आवास के समीप बसी तीन प्रमुख झुग्गी बस्तियों में रहने वाले 350 से अधिक निवासियों को छह सप्ताह के भीतर अपनी जगह खाली करने का निर्देश दिया है। अदालत ने इन परिवारों को प्रशासन द्वारा सावदा घेवरा में बनाए गए वैकल्पिक आवासों में स्थानांतरित होने का आदेश दिया है। स्थान खाली करने का निर्देश: मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने बी.आर. कैंप, मस्जिद कैंप और डीआईडी कॉलोनी के निवासियों को सावदा घेवरा की दूसरी कॉलोनी में आवंटित मकानों में जाने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है। निर्धारित समयसीमा के बाद यदि भूमि खाली नहीं की जाती है, तो प्रशासन आवश्यकता पड़ने पर पुलिस बल की सहायता से खाली कराने की कार्रवाई करेगा।
दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड को निर्देश दिया गया है कि वह स्थानांतरित होने वाले परिवारों के घरेलू सामान को नए आवास तक पहुंचाने के लिए परिवहन की व्यवस्था करे। मुख्य न्यायाधीश द्वारा लिखे गए 49 पृष्ठों के विस्तृत फैसले में स्पष्ट किया गया कि पुनर्वास की प्रक्रिया केवल कागजी नहीं, बल्कि सार्थक और प्रभावी होनी चाहिए। संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्राप्त जीवन के अधिकार में मानवीय गरिमा के साथ जीवन जीना भी शामिल है।
इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और छह महीने तक निगरानी रखने के लिए एक सात सदस्यीय समिति गठित की गई है। सेवानिवृत्त दिल्ली उच्चतर न्यायिक सेवा अधिकारी मनमोहन शर्मा इस समिति के अध्यक्ष होंगे। इसमें दिल्ली के सभी संबंधित विभागों के अलावा केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय, तथा दिल्ली सरकार के शिक्षा और स्वास्थ्य विभागों के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल रहेंगे।
अदालत ने केंद्र सरकार को 4 जून के अपने पिछले आदेश पर कायम रहने का निर्देश दिया। इसके तहत विस्थापित होने वाले प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को पुनर्वास के शुरुआती एक वर्ष तक दिल्ली मेट्रो में मुफ्त यात्रा की सुविधा प्रदान की जाएगी।