शिवपुरी (मध्य प्रदेश): जिले की खनियाधाना तहसील के आहार बानपुर गांव के निवासी 50 वर्षीय हरिराम प्रजापति की ग्वालियर ले जाते समय रास्ते में दर्दनाक मौत हो गई। परिजनों का गंभीर आरोप है कि शिवपुरी मेडिकल कॉलेज और एंबुलेंस प्रबंधन की भारी लापरवाही व लचर व्यवस्था के चलते समय पर चिकित्सीय सहायता नहीं मिल पाई, जिससे मरीज की जान चली गई। पिता की आकस्मिक मृत्यु के बाद उनके पुत्र अरुण प्रजापति ने शव के पास बैठकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया, जिसमें ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों और स्वास्थ्य अमले पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। बेटे का मुख्य आरोप है कि जब वे अपने पिता को लेकर अस्पताल पहुंचे, तब डॉक्टर मरीजों के इलाज की बजाय अपने मोबाइल पर ‘पबजी’ गेम खेलने में व्यस्त थे।
🏥 गंभीर हालत में खनियाधाना से शिवपुरी मेडिकल कॉलेज किए गए थे रेफर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, हरिराम प्रजापति की अचानक दोपहर के समय तबीयत बिगड़ गई थी। उनके पैरों में तीव्र दर्द था और उनका मुंह भी नहीं खुल पा रहा था।
गंभीर स्थिति को देखते हुए परिजन उन्हें फौरन खनियाधाना के स्थानीय सरकारी अस्पताल ले गए। वहां प्राथमिक उपचार देने के बाद चिकित्सकों ने उनकी नाज़ुक हालत को भांपते हुए उन्हें शिवपुरी मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया। अस्पताल में हुई इस पूरी घटना और बदइंतजमी को लेकर मृतक के बेटे अरुण ने रोते हुए सोशल मीडिया पर अपनी पीड़ा साझा की।
📱 ‘इलाज में टालमटोल करते रहे डॉक्टर, एंबुलेंस मिलने में भी हुई भारी देरी’
वायरल वीडियो में बेटे अरुण ने आरोप लगाया है कि जब वे अपने पिता को लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे, तो वहां मौजूद डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने मरीज की गंभीरता को नजरअंदाज किया।
काफी समय तक उचित इलाज न मिलने के कारण हरिराम की स्थिति लगातार बदतर होती चली गई। इसके बाद आनन-फानन में उन्हें ग्वालियर रेफर कर दिया गया, लेकिन वहां भेजने के लिए समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई। परिजनों का कहना है कि एंबुलेंस और स्वास्थ्य सुविधाओं के मिलने में हुई इस लंबी देरी के कारण ही ग्वालियर पहुंचने से पहले रास्ते में ही हरिराम की सांसें थम गईं।
🩺 मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की सफाई: ‘मरीज की हालत पहले से ही बेहद गंभीर थी’
इस पूरे प्रकरण पर शिवपुरी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है।
मेडिकल कॉलेज शिवपुरी के डीन डॉ. आशुतोष चौरसिया ने सफाई देते हुए कहा कि जब मरीज को अस्पताल लाया गया था, तब उनकी शारीरिक स्थिति पहले से ही काफी नाजुक और चिंताजनक थी। ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों ने अपनी तरफ से प्राथमिक स्तर पर सभी संभव जीवन रक्षक उपाय किए, किंतु स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर होने के कारण उन्हें उच्चस्तरीय विशेषज्ञ उपचार के लिए ग्वालियर रेफर करना पड़ा।
🔍 जिला स्वास्थ्य विभाग ने लिया संज्ञान, CMHO ने दिए जांच के निर्देश
मामले का वीडियो सामने आने और परिजनों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के तूल पकड़ने के बाद जिला स्वास्थ्य प्रशासन हरकत में आ गया है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. संजय ऋषीश्वर ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए कहा कि खनियाधाना अस्पताल से लेकर शिवपुरी मेडिकल कॉलेज तक के पूरे इलाज के घटनाक्रम की उच्चस्तरीय समीक्षा की जा रही है। जांच में यदि ड्यूटी पर तैनात किसी भी डॉक्टर या अस्पताल स्टाफ की लापरवाही अथवा कोताही पाई जाती है, तो उनके विरुद्ध नियमानुसार कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।