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काला सागर में लापता भारतीय नाविकों का पता नहीं

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को औपचारिक तौर पर जानकारी दी

सीजेआई की पीठ में जानकारी दी गयी

दो भारतीय वहां लापता हो गये थे

अब बचाव अभियान भी रोक दिया

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि यूक्रेन के पास काले सागर में उनके कार्गो पोत पर हुए हमले के बाद लापता हुए दो भारतीय नाविकों का तमाम गहन खोज और बचाव अभियानों के बावजूद कोई सुराग नहीं मिल सका है।

सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ को बताया कि यह खोज और बचाव अभियान यूक्रेनी अधिकारियों, रोमानियाई समुद्री बचाव समन्वय केंद्र, रोमानियाई तटरक्षक बल और अन्य संबंधित बचाव सेवाओं द्वारा संयुक्त रूप से चलाए गए थे। पीठ ने विदेश मंत्रालय द्वारा दाखिल की गई कार्रवाई रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए कहा कि 5 अगस्त तक प्राप्त जानकारी के अनुसार, दीपक कुमार गुप्ता और रामा चंद्र का कुछ पता नहीं चल पाया है।

पीठ ने अपने आदेश में दर्ज किया, यह बताया गया है कि नई जानकारी मिलने तक खोज अभियान फिलहाल स्थगित कर दिए गए हैं, जबकि डीजीएमए सभी लंबित जांच और एसएआर (खोज और बचाव) रिपोर्टों पर लगातार नजर बनाए हुए है और सभी संबंधित पक्षों के साथ संपर्क में है। इसके साथ ही, अदालत ने केंद्र सरकार को लापता नाविकों के परिवारों के लिए बीमा दावों की प्रक्रिया को आसान बनाने और मदद करने का निर्देश दिया।

याचिकाकर्ता ने कहा था कि भारत सरकार और दोनों देशों में भारतीय दूतावासों से परिवार के लगातार अनुरोधों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। याचिका में यह भी तर्क दिया गया था कि परिवार ने 26 जुलाई से 30 जुलाई के बीच विदेश मंत्रालय और दोनों देशों में भारतीय दूतावासों को पत्र लिखा था, लेकिन इन ज्ञापनों पर कोई प्रतिक्रिया या सकारात्मक आश्वासन नहीं मिला।

यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह के पास भारतीय नाविकों को ले जा रहे उनके व्यापारी पोत पर हुए हमले के बाद 22 वर्षीय दीपक गुप्ता लापता हो गए थे। सुनवाई की शुरुआत में सॉलिसीटर जनरल मेहता ने कहा कि विदेश मंत्रालय और समुद्री प्रशासन महानिदेशालय ने संयुक्त रूप से कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल कर दी है और तमाम कोशिशों के बावजूद दोनों नाविकों का पता नहीं लगाया जा सका है।

न्यायमूर्ति बागची ने सॉलिसीटर जनरल मेहता से कहा कि नाविकों के रोजगार अनुबंध में बीमा का प्रावधान होता है, और सरकार को लापता नाविकों के परिवारों के लिए बीमा दावों को सुगम बनाना चाहिए। वहीं, परिवारों के वकील ने आरोप लगाया कि जमीन पर कोई खोज और बचाव अभियान नहीं चलाया गया था और दूतावास का विवरण 26 जुलाई की स्थिति को ही दर्शाता है।

मेहता ने दलील दी कि समुद्र में खोज और बचाव अभियान जारी रखने का अब कोई व्यावहारिक उद्देश्य नहीं बचा था, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अधिकारी सभी संबंधित पक्षों के साथ लगातार संपर्क और फॉलो-अप बनाए हुए हैं।