थ्री डी प्रिंटिंग तकनीक का एक और फायदा सामने आया
टंगस्टन कार्बाइड कोबाल्ट है यह
इस विधि से निर्माण लागत भी कम
औद्योगिक विनिर्माण का नया कदम
राष्ट्रीय खबर
रांचीः वैज्ञानिकों ने हाल ही में 3डी प्रिंटिंग तकनीक का उपयोग करके पृथ्वी की सबसे मजबूत और कठोर धातुओं में से एक—टंगस्टन कार्बाइड-कोबाल्ट को सफलतापूर्वक प्रिंट किया है। इस सामग्री का उपयोग अत्यधिक घिसाव, तीव्र दबाव और बार-बार होने वाले भारी इस्तेमाल को सहन करने की क्षमता के कारण औद्योगिक उपकरणों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। इसकी यही असाधारण कठोरता इसे कटिंग टूल्स, ड्रिल और निर्माण उपकरणों के लिए आदर्श बनाती है, लेकिन साथ ही यह इसके विनिर्माण में एक बड़ी चुनौती भी पैदा करती है। पारंपरिक तरीकों से इसे आकार देना बेहद कठिन और खर्चीला होता है, तथा इसमें तैयार उत्पाद की तुलना में कच्चे माल की बर्बादी भी अधिक होती है।
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अब शोधकर्ताओं ने एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग (जिसे आमतौर पर 3डी प्रिंटिंग कहा जाता है) का उपयोग करके टंगस्टन कार्बाइड-कोबाल्ट सीमेंटेड कार्बाइड के निर्माण के लिए एक नए और वैकल्पिक तरीके का परीक्षण किया है। उनका यह नया तरीका इस सामग्री की मजबूती और कठोरता को पूरी तरह बरकरार रखते हुए उत्पादन लागत को कम करने और कचरे को न्यूनतम करने में मददगार साबित हो सकता है। इस शोध के निष्कर्ष ‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ रेफ्रेक्ट्री मेटल्स एंड हार्ड मैटेरियल्स’ में प्रकाशित किए गए हैं।
टंगस्टन कार्बाइड-कोबाल्ट सीमेंटेड कार्बाइड का उपयोग उन क्षेत्रों में व्यापक रूप से होता है जहां अत्यधिक कठोरता और घिसाव से बचाव की आवश्यकता होती है। इस सामग्री में टंगस्टन कार्बाइड कठोरता प्रदान करता है, जबकि कोबाल्ट एक धात्विक बाइंडर के रूप में कार्य करता है जो कार्बाइड के कणों को आपस में मजबूती से बांधकर रखता है। वर्तमान में निर्माता इस सामग्री का उत्पादन मुख्य रूप से पाउडर मेटलर्जी के माध्यम से करते हैं। हालांकि, पारंपरिक उत्पादन प्रक्रियाओं में कीमती कच्चे माल की बड़ी मात्रा खर्च होती है और उत्पादन की तुलना में बर्बादी अधिक होती है।
इस समस्या से निपटने के लिए शोधकर्ताओं ने हॉट-वायर लेजर इरेडिएशन तकनीक का उपयोग किया। इस प्रक्रिया में लेजर बीम को पहले से गर्म किए गए फिलर वायर के साथ जोड़ा जाता है। तार को कार्य-सतह पर पहुंचने से पहले गर्म करने से सामग्री को तेजी से और अधिक कुशलता से जोड़ा जा सकता है, जिससे लेजर से आवश्यक ऊर्जा की खपत कम होती है। शोधकर्ताओं ने दो अलग-अलग फैब्रिकेशन व्यवस्थाओं का परीक्षण किया। दोनों तरीकों में धातुओं को पूरी तरह पिघलाने के बजाय उन्हें केवल इतना नरम किया गया कि सीमेंटेड कार्बाइड को आसानी से जमा किया जा सके।
हिरोशिमा यूनिवर्सिटी के ग्रेजुएट स्कूल ऑफ एडवांस्ड साइंस एंड इंजीनियरिंग के सहायक प्रोफेसर और इस अध्ययन के सह-लेखक केइता मारुमोतो ने बताया कि एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग के उपयोग से सीमेंटेड कार्बाइड को केवल वहीं जमा किया जा सकता है जहां इसकी आवश्यकता होती है, जिससे कच्चे माल की खपत काफी हद तक कम हो जाती है। प्रयोगों से यह स्पष्ट हो गया कि यह तकनीक पारंपरिक रूप से निर्मित टंगस्टन कार्बाइड-कोबाल्ट सीमेंटेड कार्बाइड की कठोरता और आंतरिक अखंडता को बनाए रख सकती है।
शोधकर्ताओं ने 1400 एचवी से अधिक की वाइकर्स कठोरता वाला एक आधार पदार्थ तैयार किया, जो इसे उद्योग में उपयोग होने वाली सबसे मजबूत सामग्रियों की श्रेणी में रखता है। हालांकि शुरुआती परीक्षणों में कुछ तकनीकी बाधाएं आईं, जिन्हें शोधकर्ताओं ने एक निकल-मिश्र धातु आधारित मध्य परत जोड़कर और तापमान को सटीक रूप से नियंत्रित करके सफलतापूर्वक दूर कर लिया। यह नई तकनीक भविष्य में उन्नत और महंगे औद्योगिक उपकरणों के निर्माण को अधिक किफायती और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकती है।
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