Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
धमतरी में सावन सोमवार की तैयारियों के बीच बड़ा हादसा, शिव मंदिर में करंट लगने से 20 वर्षीय युवक की म... मणिपुर में सुरक्षा बलों का बड़ा एक्शन: थौबल और मोरेह सीमा से भारी मात्रा में हथियार व 6 IED बरामद, 9... "बच्चों को 'कॉकरोच' नहीं, विवेकानंद और दयानंद बनाएं": मुरादाबाद गुरुकुल में बोले आचार्य प्रमोद कृष्ण... राजस्थान के बीकानेर में 'ऑपरेशन शॉकवेव' से हड़कंप, पाकिस्तान की बड़ी नार्को-टेरर साजिश नाकाम उज्जैन के महिदपुर रोड स्टेशन पर टला बड़ा रेल हादसा, मेमू ट्रेन के इंजन पर गिरी 25 हजार KV की हाई-वोल... आईपीएल 2026 के बाद ट्रेडिंग विंडो में गर्माया बाजार, क्या मुंबई इंडियंस छोड़कर सीएसके में जाएंगे हार... अगस्त के पहले रविवार को बॉलीवुड में फ्रेंडशिप डे की धूम, सेलिब्रिटीज ने शेयर की दिल छू लेने वाली पोस... इंडोनेशिया के समुद्र में 271 यात्रियों से भरी नाव में लगी भीषण आग: 5 की मौत, 41 लापता; पानी में कूदे... यह मिश्र धातु स्टील से दस गुणा मजबूत पर लचीली है, देखें वीडियो बढ़ती एलपीजी कीमतों के बीच लोकप्रिय हुआ 5 किलो का 'छोटू' सिलेंडर, बिना पक्के एड्रेस प्रूफ के मिलेगा ...

अफ्रीकी चूहा मगावा की सात फीट ऊंची प्रतिमा लगायी, देखें वीडियो

हजारों लोगों की जान बचाने वाले प्राणी का कंबोडिया में सम्मान

सौ से अधिक बारूदी सुरंग खोजे थे

उसे इस काम के लिए प्रशिक्षण मिला था

वजन कम होने की वजह से चला जाता था

एजेंसियां

सिएम रीपः कंबोडिया ने हाल ही में मगावा नामक उस असाधारण अफ्रीकी विशालकाय थैली वाले चूहे की स्मृति में सात फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया है, जिसने अपने जीवनकाल में 100 से अधिक विस्फोटक उपकरणों का पता लगाकर अनगिनत जानें बचाईं। स्मिथसोनियन मैगज़ीन के अनुसार, सिएम रीप में स्थापित यह प्रतिमा मगावा के साहस और मानवता के प्रति उसके योगदान को समर्पित है, जिसमें उसे अपने बहादुरी पदक के साथ सीधा खड़ा दिखाया गया है।

देखें इससे संबंधित वीडियो

मगावा का सफर 2016 में बेल्जियम के गैर-लाभकारी संगठन एपीओपीओ के साथ प्रशिक्षण से शुरू हुआ था। उसे विस्फोटक रसायनों की पहचान करने और मिट्टी को खरोंच कर उनके स्थान का संकेत देने के लिए प्रशिक्षित किया गया था। मगावा का वजन इतना कम था कि वह उन खतरनाक क्षेत्रों में बिना किसी जोखिम के चल सकता था जो मनुष्यों के लिए जानलेवा साबित हो सकते थे। अपनी कार्यकुशलता का परिचय देते हुए, वह टेनिस कोर्ट के आकार के एक क्षेत्र को मात्र 20 मिनट में जांचने में सक्षम था। विस्फोटक मिलने पर उसे मूंगफली या केले के टुकड़े ईनाम के रूप में दिए जाते थे।

अपने पांच साल के करियर के दौरान, मगावा ने 15 लाख वर्ग फुट से अधिक भूमि को बारूदी सुरंगों से मुक्त कराया। वह एपीओपीओ के सबसे सफल बम-खोजने वाले चूहे के रूप में उभरा। वर्ष 2020 में, उसे पीपल्स डिस्पेंसरी फॉर सिक एनिमल्स द्वारा स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया, जो यह सम्मान पाने वाला इतिहास का पहला चूहा बना।

मगावा का यह कार्य कंबोडिया के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण था। 1960 के दशक से चले आ रहे संघर्षों ने देश को लाखों बारूदी सुरंगों से भर दिया था, जिससे कृषि भूमि और आवासीय क्षेत्र अत्यंत असुरक्षित हो गए थे। कंबोडिया में प्रति व्यक्ति बारूदी सुरंग से विकलांग होने वालों की संख्या विश्व में सबसे अधिक है, जहाँ लगभग 40,000 लोगों ने अपने अंग खो दिए हैं। मगावा ने न केवल विस्फोटक खोजे, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए सुरक्षित जीवन और बच्चों के लिए खेलने की जगह बहाल करने में मदद की। मगावा के इस साहसिक कार्य ने युद्ध के दंश को झेल रहे कंबोडियाई लोगों को एक नई उम्मीद दी है।