हजारों लोगों की जान बचाने वाले प्राणी का कंबोडिया में सम्मान
सौ से अधिक बारूदी सुरंग खोजे थे
उसे इस काम के लिए प्रशिक्षण मिला था
वजन कम होने की वजह से चला जाता था
एजेंसियां
सिएम रीपः कंबोडिया ने हाल ही में मगावा नामक उस असाधारण अफ्रीकी विशालकाय थैली वाले चूहे की स्मृति में सात फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया है, जिसने अपने जीवनकाल में 100 से अधिक विस्फोटक उपकरणों का पता लगाकर अनगिनत जानें बचाईं। स्मिथसोनियन मैगज़ीन के अनुसार, सिएम रीप में स्थापित यह प्रतिमा मगावा के साहस और मानवता के प्रति उसके योगदान को समर्पित है, जिसमें उसे अपने बहादुरी पदक के साथ सीधा खड़ा दिखाया गया है।
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मगावा का सफर 2016 में बेल्जियम के गैर-लाभकारी संगठन एपीओपीओ के साथ प्रशिक्षण से शुरू हुआ था। उसे विस्फोटक रसायनों की पहचान करने और मिट्टी को खरोंच कर उनके स्थान का संकेत देने के लिए प्रशिक्षित किया गया था। मगावा का वजन इतना कम था कि वह उन खतरनाक क्षेत्रों में बिना किसी जोखिम के चल सकता था जो मनुष्यों के लिए जानलेवा साबित हो सकते थे। अपनी कार्यकुशलता का परिचय देते हुए, वह टेनिस कोर्ट के आकार के एक क्षेत्र को मात्र 20 मिनट में जांचने में सक्षम था। विस्फोटक मिलने पर उसे मूंगफली या केले के टुकड़े ईनाम के रूप में दिए जाते थे।
अपने पांच साल के करियर के दौरान, मगावा ने 15 लाख वर्ग फुट से अधिक भूमि को बारूदी सुरंगों से मुक्त कराया। वह एपीओपीओ के सबसे सफल बम-खोजने वाले चूहे के रूप में उभरा। वर्ष 2020 में, उसे पीपल्स डिस्पेंसरी फॉर सिक एनिमल्स द्वारा स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया, जो यह सम्मान पाने वाला इतिहास का पहला चूहा बना।
मगावा का यह कार्य कंबोडिया के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण था। 1960 के दशक से चले आ रहे संघर्षों ने देश को लाखों बारूदी सुरंगों से भर दिया था, जिससे कृषि भूमि और आवासीय क्षेत्र अत्यंत असुरक्षित हो गए थे। कंबोडिया में प्रति व्यक्ति बारूदी सुरंग से विकलांग होने वालों की संख्या विश्व में सबसे अधिक है, जहाँ लगभग 40,000 लोगों ने अपने अंग खो दिए हैं। मगावा ने न केवल विस्फोटक खोजे, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए सुरक्षित जीवन और बच्चों के लिए खेलने की जगह बहाल करने में मदद की। मगावा के इस साहसिक कार्य ने युद्ध के दंश को झेल रहे कंबोडियाई लोगों को एक नई उम्मीद दी है।