दिल्ली फायरिंग पर सदन को गुमराह कियाः वेणुगोपाल
सदन के भीतर गलत जानकारी दी थी
अब तो सच भी सामने आ चुका है
घायल भी जनता के सामने आये हैं
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल ने शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के खिलाफ संसद में विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश किया। यह विवाद 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के दौरान फायरिंग न होने के मंत्री के दावे से उत्पन्न हुआ है। वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि मंत्री ने सदन के पटल पर सरासर झूठ बोला है।
विवाद की जड़ बुधवार दोपहर 3 बजे की वह चर्चा है, जिसमें मंत्री जितेंद्र सिंह परीक्षा प्रश्नपत्र लीक विरोधी कानून पर सरकार का पक्ष रख रहे थे। उस दौरान उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था, यह बार-बार स्पष्ट किया गया है कि कोई फायरिंग नहीं हुई है… तो ऐसे आदेश देने का सवाल ही नहीं उठता।
वेणुगोपाल ने इस दावे को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि वास्तविकता इसके विपरीत है। उन्होंने तर्क दिया कि राहुल गांधी ने मीडिया के सामने स्वयं पेलेट गन के एक पीड़ित से मुलाकात की है। इसके अतिरिक्त, मीडिया रिपोर्टों और अस्पताल के रिकॉर्ड में भी उन पीड़ितों के प्रमाण मौजूद हैं जो इस फायरिंग में घायल हुए थे। वेणुगोपाल ने जोर देकर कहा कि सरकार संसद में ऐसे स्पष्ट झूठ के साथ बच नहीं सकती और मंत्री के खिलाफ उचित कार्रवाई होनी चाहिए।
यह विशेषाधिकार प्रस्ताव 20 जुलाई को हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कथित बर्बरता को लेकर विपक्ष द्वारा सरकार पर किए जा रहे हमलों की एक कड़ी है। इससे पहले, विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ आक्रामक टिप्पणी की थी, जिसके कारण सदन में भारी हंगामा हुआ था और उनके भाषण के कुछ अंशों को रिकॉर्ड से हटा दिया गया था।
उल्लेखनीय है कि गुरुवार रात को संसद ने परीक्षा प्रश्नपत्र लीक विरोधी विधेयक पारित कर दिया। उस समय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा था कि यह कानून सरकार की रचनात्मक सुझावों को स्वीकार करने और अनुभवों से सीखकर व्यवस्था को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हालांकि, अब इस नए कानून की सफलता और विश्वसनीयता के बीच, फायरिंग पर दिए गए इस विवादित बयान ने सरकार के लिए एक नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है।