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उत्तर कोरिया की सैन्य शक्ति विस्तार से परेशान दक्षिण कोरिया

अपनी ड्रोन सेना का विस्तार का काम प्रारंभ किया

एजेंसियां

सियोलः बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य और उत्तर कोरिया से लगातार बढ़ते खतरों के बीच, दक्षिण कोरिया ने अपनी सैन्य रणनीति में एक क्रांतिकारी बदलाव की घोषणा की है। शुक्रवार को रक्षा मंत्रालय ने एक महत्वाकांक्षी योजना का अनावरण किया, जिसका उद्देश्य देश की ड्रोन और काउंटर-ड्रोन क्षमताओं को अभूतपूर्व स्तर पर विस्तार देना है। इस योजना का केंद्र बिंदु भविष्य के युद्धक्षेत्रों में मानवरहित प्रणालियों की बढ़ती भूमिका को देखते हुए तकनीक और मानव संसाधन का सही संतुलन बनाना है।

मंत्रालय की इस व्यापक योजना के तहत सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य 5,00,000 ड्रोन योद्धाओं को प्रशिक्षित करना है। यह संख्या न केवल दक्षिण कोरिया की सैन्य तैयारी की गंभीरता को दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि भविष्य की जंग में सैनिकों की भूमिका अब पारंपरिक हथियारों से हटकर रिमोट-संचालित और एआई-आधारित तकनीकों की ओर स्थानांतरित हो रही है। इन ऑपरेटरों को न केवल ड्रोन उड़ाने, बल्कि प्रतिकूल परिस्थितियों में डेटा एकत्र करने, टोही अभियान चलाने और दुश्मन के ड्रोन को विफल करने (काउंटर-ड्रोन) में निपुण बनाया जाएगा।

सैन्य उपकरणों के आधुनिकीकरण के मोर्चे पर भी दक्षिण कोरिया तेजी से काम कर रहा है। रक्षा मंत्रालय ने अगले कुछ वर्षों में 20,000 से अधिक कम लागत वाले एक्सपेंडेबल (एक बार उपयोग होने वाले) ड्रोन खरीदने का निर्णय लिया है। ये ड्रोन कामिकेज़ या सुसाइड ड्रोन की तरह इस्तेमाल किए जा सकेंगे, जो दुश्मन के रडार और सुरक्षा घेरे को भेदने में सक्षम होंगे। इनकी कम लागत सेना को बड़े पैमाने पर इनका उपयोग करने की छूट देती है, जिससे युद्ध के दौरान दुश्मन पर मनोवैज्ञानिक और सामरिक दबाव बढ़ाया जा सकेगा।

इसके अतिरिक्त, स्वदेशी उत्पादन पर जोर देते हुए दक्षिण कोरियाई सेना 2029 तक 1,10,000 ड्रोन का निर्माण करेगी। इन ड्रोनों को थल सेना, नौसेना और वायुसेना की विभिन्न इकाइयों में वितरित किया जाएगा, ताकि हर स्तर पर स्वार्म (झुंड) ड्रोन हमले और निगरानी की क्षमता बनी रहे। मंत्रालय का मानना है कि यह निवेश न केवल उत्तर कोरिया की अक्रामक गतिविधियों के खिलाफ एक मजबूत ढाल का काम करेगा, बल्कि दक्षिण कोरिया को दुनिया की अग्रणी ड्रोन-सक्षम सैन्य शक्तियों में शामिल कर देगा। यह पहल मानवरहित प्रौद्योगिकियों को मुख्यधारा में लाकर देश की रक्षा आत्मनिर्भरता को एक नया आयाम देगी।